कोरोना वायरस का संक्रमण खतरनाक महामारी का रूप लेता जा रहा है. कोविड मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या ने देश के स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लाचार और बेबस बना दिया है.
विष्णु जी के अवतार श्री राम ने मर्यादा की स्थापना और अपनी मां कैकेयी की इच्छापूर्ति के लिए राजपाट छोड़कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था. ऐसे ही कई दिव्य प्रसंगों के कारण श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है.
हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेखित है कि जब-जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार बढ़ा, अधर्म ने धर्म पर विजय पाने की कोशिश की, तब-तब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लेकर अत्याचार का नाश कर धर्म की पुनर्स्थापना की. गरुड़ पुराण के अनुसार श्रीहरि ने दस बार पृथ्वी पर अवतार लिया.
कहते हैं कि एक बार 'श्रीराम' का नाम जपने मात्र से जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. हमारे देश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म 'रामनवमी' के नाम से बड़ी धूमधाम के साथ मनाई जाती है.
गरुड़ पुराण के अनुसार चैत्र मास में शुक्लपक्ष की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में अयोध्यापति राजा दशरथ के घर में महारानी कौशल्या की कोख से श्रीराम का जन्म हुआ था. सनातन धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है.
हिंदू पौराणिक ग्रंथों में भगवान श्रीराम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है. यानी पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ पुरुष. विद्वानों का भी मानना है कि अगर आप जीवन में महान बनना चाहते हैं तो श्रीराम द्वारा दी गई नैतिक शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें. त्रेता युग में भगवान विष्णु का अवतार होने के बावजूद श्रीराम ने कहीं भी ईश्वरत्व का प्रदर्शन नहीं किया.
कोरोना संक्रमण की निरंतर बढ़ती रफ्तार ने पूरी दुनिया को दहशतजदा कर दिया है. आज स्थिति विस्फोटक इसलिए हो गयी है क्योंकि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने बच्चों और युवाओं को भी अपनी जद में लेना शुरु कर दिया है.
गुलाब का फूल प्रभावशाली स्किन टोनर का भी कार्य करती हैं. इसके लिए गुलाब की ताजी पंखुड़ियों को स्वच्छ पानी में रात भर भिगोकर रखें. प्रातःकाल गुलाब की पंखुड़ियों को अलग करके उसके पानी से चेहरे को धो लें. इससे आपकी त्वचा चिकनी एवं मुलायम होगी. यह स्किन टोनर का भी कार्य करती है.
कोरोनावायरस कितना घातक है इसका अहसास इसी से किया जा सकता है कि इसका वायरस सीधा व्यक्ति के फेफड़ों और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है. इससे व्यक्ति के रक्त का ऑक्सीजन लेबल प्रभावित होता है. उसे सांस लेने में कठिनाई होती है. ऐसी स्थिति में रक्त में ऑक्सीजन लेबल को सुचारू रखना पहली जरूरत होती है.
सनातन धर्म में यूं तो पूरा चैत्र मास का विशेष महात्म्य है, लेकिन चैत्र मास में शुक्लपक्ष की नवीं तिथि साल का सबसे शुभ एवं पवित्र दिन माना जाता है, गौरतलब है कि इस दिन हिंदू घरों में एक ओर मां दुर्गा की 9वीं शक्ति सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना होती है, वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म दिन जिसे 'रामनवमी' के नाम से जाना जाता है,
विष्णु पुराण के अनुसार त्रेता युग में जब पृथ्वी पर चारों ओर अधर्म और अत्याचार का बोलबाला था, राक्षस ऋषि-मुनियों के यज्ञ को विध्वंश करने लगे थे, तब भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर सातवां अवतार लिया था.
कोविड-19 की महामारी की दूसरी लहर ने एक बार फिर सारी दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेना शुरु कर दिया है. खबरों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में 3 गुना ज्यादा गति से कोविड पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है.
हिंदू धर्म में नवरात्र के नौ दिन बहुत पवित्र दिन माने जाते हैं. मान्यता है कि इन नौ दिनों के लिए माँ भगवती पृथ्वी पर विचरण करती हैं. उनका दिव्य सम्मान करने और अपने संकट दूर करने के लिए भक्त पूरे 9 दिनों तक उनकी विधिवत पूजा-अनुष्ठान करते हैं.
डॉ. भीम राव आंबेडकर की जब भी चर्चा होती है तो बात दलितोत्थान एवं दलितों को आरक्षण पर आकर थम जाती है. उन्हें 'दलितों का मसीहा' की संज्ञा से भी नवाजा जाता है. बहुत कम लोगों को ज्ञात होगा कि डॉ आंबेडकर ने महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे ज्यादा और ठोस कार्य किये, जिसका सुख आज महिलाएं उठा रही हैं, वरना आजादी से पूर्व महिलाओं को इतने अधिकार प्राप्त नहीं थे.
आखिर देवी देवताओं को फूल क्यों चढ़ाये जाते हैं'? यह सवाल गाहे-बगाहे हर भक्त के जेहन में भी कौंधता होगा. लेकिन जवाब शायद ही किसी के पास होगा, क्योंकि देवी-देवताओं को फूल चढ़ाने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, हम उसी परंपरा का निर्वाह करते आ रहे हैं.
गुड़ी पड़वा पर मेहमानों का स्वागत करना है पूरन पोली और फ्रूट श्रीखंड से तो इस विधि से बनाए और जीत ले सबका मन.
रमजान का पूरा माह पाक माह माना जाता है, इसलिए इस पूरे माह किसी की बुराई, झूठ, फरेब, ईर्ष्या, लालच, अपशब्दों के प्रयोग इत्यादि से खुद को दूर रहना चाहिए.
हिंदू धर्म में चैत्र मास का बहुत खास महत्व होता है. चैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा के दिन दक्षिण भारत में जहां उगादी मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र और गोवा में गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa ) के रूप में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह की प्रतिपदा को ही बह्मा जी ने सृष्टि का निर्णाण किया था.
हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में एक है गुड़ी पड़वा, जो चैत्र मास शुक्लपक्ष की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है. महाराष्ट्र एवं गोवा में 'गुडी पड़वा' को नव वर्ष की तरह मनाया जाता है, विभिन्न राज्यों में गुड़ी पड़वा विभिन्न नामों से मनाया जाता है. मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि का निर्माण किया था और सतयुग की शुरुआत हुई थी.
'मातृत्व' प्रकृति का अनमोल तोहफा है. इसी से प्रकृति का विकास होता है. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस संदर्भ में भारत की बात करें तो यह मातृत्व गर्भवती माँओं के लिए किसी सजा से कम नहीं. हमारे देश में ऐसी महिलाओं की कमी नहीं है, जो बच्चे को जन्म देते समय ही मौत को गले लगा लेती हैं, इसकी अनेक वजहें और अनेक उदाहरण आपको मिलेंगे.