एजेंसी न्यूज

वायु प्रदूषण की अधिकता वाले अमरीकी शहरों में कोरोना का संक्रमण ज्यादा: रिपोर्ट

12 अप्रैल कोरोना वायरस संक्रमण और वायु प्रदूषण के बीच संबंध उजागर करने वाली एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के उन शहरों में कोरोना संक्रमण से मौत होने के ज्यादा मामले सामने आये हैं जिनमें वायु प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से अधिक है.

वायु प्रदूषण की अधिकता वाले अमरीकी शहरों में कोरोना का संक्रमण ज्यादा: रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: PTI)

नयी दिल्ली:- 12 अप्रैल कोरोना वायरस संक्रमण और वायु प्रदूषण के बीच संबंध उजागर करने वाली एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के उन शहरों में कोरोना संक्रमण से मौत होने के ज्यादा मामले सामने आये हैं जिनमें वायु प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से अधिक है. स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी अमेरिकी संस्थान ‘हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ की हाल ही में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण की अधिकता वाले इलाकों में कोविड-19 के मरीजों की मौत के ज्यादा मामले सामने आये हैं.

इसके अनुसार अमेरिका के 3080 कांउटी में वायु प्रदूषण के स्तर और कोरोना से हुयी मौत के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर यह बात सामने आयी है. अध्ययन रिपोर्ट में अमेरिकी शहरों में प्रदूषण की मात्रा और कोरोना वायरस संक्रमण से मौत के आंकड़ों को सूचीबद्ध नहीं किया गया है, बल्कि अध्ययन में शामिल विभिन्न कांउटी (अमेरिका में एक कांउटी में कुछ शहर और कस्बे होते हैं) में प्रदूषण और आबादी सहित अन्य मानकों के आधार पर कोरोना के असर संबंधी चार अप्रैल तक जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन किया गया है.

यह भी पढ़ें: कोरोना वायरस: इंदौर में दो और मरीजों की मौत, मृतक संख्या 32 पर पहुंची

इसमें पाया गया कि मेनहट्टन कांउटी में जिन शहरों में पिछले 20 साल में पीएम 2.5 का औसत स्तर एक यूनिट अर्थात एक माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम पाया गया, उनकी तुलना में इस कांउटी में कोरोना से 248 कम मौतें हुयीं. इसके अनुसार वाहन, तेल शोधन एवं बिजली संयंत्रों के कारण वायु प्रदूषण का सामना कर रहे अमेरिकी शहरों में, उन शहरों की तुलना में कोरोना से अधिक मौत हुयीं जिनमें वायु प्रदूषण या तो तुलनात्मक रूप से कम है या प्रदूषण की वजह इन तीन कारणों से इतर कुछ और है.

अध्ययन में शहर की आबादी, अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या, कोरोना का परीक्षण किये गये मरीजों की संख्या, मौसम, सामाजिक आर्थिक स्थिति और लोगों के बर्ताव, जिसमें मोटापे की प्रवृत्ति और धूम्रपान की आदत को प्रमुख मानक के तौर पर शामिल किया गया. इसके आधार पर अध्ययन में पाया गया कि कोरोना से हुयी मौत की दर को बढ़ाने में वायु प्रदूषण के लिये जिम्मेदार पार्टीकुलेट तत्व (पीएम 2.5) के संपर्क में अधिक समय तक रहना, एक वजह के रुप में सामने आया है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक कई दशक तक वायु प्रदूषण की अधिकता वाले इलाके में रहने वालों के लिये कोरोना से मौत का खतरा 15 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. जबकि जिन शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रित था, उनके निवासियों के लिये यह खतरा 15 प्रतिशत कम पाया गया.

रिपोर्ट में मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर भविष्य के बारे में आगाह भी किया गया है कि अधिक वायु प्रदूषण वाले डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में, कम वायु प्रदूषण वाली पड़ोसी कांउटी मोंटगोमरी की तुलना में कोरोना से मौत के अधिक मामले सामने आ सकते हैं. इसी प्रकार शिकागो में पड़ोस के इलाके लेक कांउटी और अटलांटा में पड़ोस की डगलस कांउटी की तुलना में कोरोना की अधिक गंभीर स्थिति का हवाला देते हुये इसे इन शहरों में अधिक वायु प्रदूषण होने से जोड़ा गया है.

इस आधार पर रिपोर्ट में शिकागो और अटलांटा में लेक तथा डगलस कांउटी की तुलना में कोरोना से मौत की दर अधिक रहने के प्रति आगाह किया है. अध्ययन दल में शामिल वरिष्ठ वैज्ञानिक फ्रांसिस्का डोमिनिकी ने इस बात के लिये आगाह भी किया कि अधिक वायु प्रदूषण वाली कांउटी में न सिर्फ कोरोना के मरीजों की संख्या अधिक होगी बल्कि इनकी मौत के ज्यादा मामले भी सामने आने का खतरा है.

इसके मद्देनजर उन्होंने वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को युद्धस्तर पर सुचारु रखने के महत्व को रेखांकित करते हुये कोरोना संकट के बाद भी मानव स्वास्थ्य की खातिर हवा को साफ बनाने को प्राथमिकता देने को अनिवार्य शर्त बताया.

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 12, 2020 11:26 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).