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Sambhaji Maharaj Jayanti 2019: वीरयोद्धा संभाजी महाराज की देन है सांभर

यदि आप दक्षिण भारतीय भोजन के प्रेमी हैं तो आपको दाल और सब्जी से बनाया जाने वाला स्वादिष्ट सांबर भी पसंद करेंगे. लेकिन मूल रूप से इडली या वड़ा के साथ परोसे जाने वाले दक्षिण भारतीय व्यंजन में मराठा शासक संभाजी महाराज के निशान हैं....

Sambhaji Maharaj Jayanti 2019: वीरयोद्धा संभाजी महाराज की देन है सांभर
संभाजी महाराज का सांभर से है कनेक्शन, (Photo Credits: Wikimedia Commons)

यदि आप दक्षिण भारतीय भोजन के प्रेमी हैं तो आपको दाल और सब्जी से बनाया जाने वाला स्वादिष्ट सांबर भी पसंद करेंगे. लेकिन मूल रूप से इडली या वड़ा के साथ परोसे जाने वाले दक्षिण भारतीय व्यंजन में मराठा शासक संभाजी महाराज के निशान हैं. संभाजी राजे भोसले महान नेता शिवाजी महाराज के सबसे बड़े पुत्र थे. वह अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में मराठा राज्य के दूसरे शासक थे. उन्होंने लगभग 9 वर्षों तक मराठी राज्य पर शासन किया. 14 मई 1657 को जन्मे संभाजी महाराज की आज 362 वीं जयंती है और इस दिन हम आपको संभाजी महाराज के साथ बेहद लोकप्रिय पकवान सांभर के संबंध के बारे में बताते हैं. सांभर की उत्पत्ति तंजावुर की रसोई में हुई थी. कहा जाता है कि यह शाहजी महाराज थे जिन्होंने यहां दाल बनाने का प्रयास किया था. शाहजी ने एक दिन शाही रसोई में प्रवेश कर 'आमटी' यानी खट्टी दाल बनाने का फैसला किया. दाल बनाने के लिए उन्होंने तुअर दाल का इस्तेमाल किया और कोकम की जगह इमली का गूदा मिलाया. रसोई के अन्य रसोइयों ने उन्हें बताया कि इमली को कभी भी दाल में नहीं मिलाया जाता है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह सिर्फ प्रयोग कर रहे हैं. खाना बनने के बाद जब अदालत में परोसा गया, तो सभी को बहुत अच्छा लगा और ऐसा कहा जाता है कि संभाजी महाराज दरबार में उस दिन मेहमान थे और 'दाल' को पहली बार उन्हें परोसा गया था. क्योंकि उन्हें यह बहुत पसंद आया इसलिए इसका नाम उनके नाम पर सांबर रखा गया.

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जबकि कुछ कहानियों में कहा गया है कि यह शाहजी महाराज थे जिन्होंने सांबर को पकाया था. अन्य लोग बताते हैं कि यह स्वयं संभाजी थे जो इस रेसिपी के साथ आए थे. ऐसा कहा जाता है कि जब बड़े रसोइया नहीं थे तब संभाजी ने शाही रसोई में प्रवेश किया और खुद के लिए दाल बनाने का फैसला किया. उन्होंने तुअर दाल में इमली का इस्तेमाल किया और उन्हें ये खट्टी दाल बहुत ज्यादा पसंद आई. इसलिए इसका नाम संभाजी महाराज के नाम पर रखा गया.

आखिरकार ये पकवान दक्षिणी राज्यों में लोकप्रिय हो गया. यह देश के अन्य हिस्सों में फैल गया. आज सांबर को दक्षिण भारतीय व्यंजन माना जाता है. इतने वर्षों में व्यंजनों का विकास हुआ और आज सांभर की 20 से अधिक किस्में हैं. चूंकि हम सांभर के बारे में इतनी बातें कर रहे हैं, हमें यकीन है कि आप में से कुछ लोग इसे बनाना भी चाहेंगे.

देखिए सांभर की रेसिपी वीडियो:

हम नहीं जानते कि पहले सांभर को वास्तव में किसने पकाया था, लेकिन एक बात निश्चित है कि संभाजी महाराज का सांभर से कुछ नाता जरुर है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 14, 2019 09:57 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).