वाशिंगटन, 16 जनवरी : इजरायल और हमास महीनों के गहन कूटनीतिक प्रयासों के बाद युद्धविराम और बंधक समझौते पर पहुंच गए हैं. अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता से हुए इस समझौते से गाजा में जारी हिंसा रुकेगी, फिलिस्तीनी नागरिकों को महत्वपूर्ण मानवीय सहायता मिलेगी और 15 महीने से अधिक समय से बंधक बनाए गए बंधकों को वापस लाया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस समझौते तक पहुंचने की चुनौतीपूर्ण राह पर विचार करते हुए कहा कि यह उनके लिए अब तक अनुभव की गई सबसे कठिन वार्ताओं में से एक थी.
जो बाइडेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "इस समझौते की राह आसान नहीं रही है. मैंने दशकों तक विदेश नीति में काम किया है, यह मेरे द्वारा अब तक अनुभव की गई सबसे कठिन वार्ताओं में से एक रही है. हम इस बिंदु पर इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से हमास पर दबाव बनाया है." यह भी पढ़ें : गाजा के साथ संघर्ष विराम समझौता अभी पूरा नहीं: नेतन्याहू
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते के महत्व पर जोर दिया, जिसे पहले मई 2024 में प्रस्तावित किया गया था और बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा इसका समर्थन किया गया था.
जो बाइडेन ने इस समझौते के मुख्य कारणों को बताया, जिसमें इजरायल की सैन्य कार्रवाईयों से हमास पर बढ़ा दबाव और क्षेत्रीय हालात में बदलाव शामिल हैं. उन्होंने कहा, "यह न केवल हमास पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव, लेबनान में युद्ध विराम और ईरान के कमजोर होने के बाद बदले क्षेत्रीय समीकरण का परिणाम है, बल्कि यह दृढ़ और अमेरिकी कूटनीति का भी परिणाम है.
युद्धविराम समझौते को गाजा में तबाही मचाने वाली हिंसा को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सराहा गया है. बाइडेन ने कहा, "इस खबर का स्वागत करते हुए, हम उन सभी परिवारों को याद करते हैं जिनके प्रियजन 7 अक्टूबर के हमास के हमले में मारे गए थे." जो बाइडेन ने समझौते की सफलता का जश्न मनाते हुए, क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा बनाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की पुष्टि की.













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