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एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में बढ़ जाती है रीढ़ की हड्डी, जानें इसके लक्षण और बचाव

एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing spondylitis) में रीढ़ की हड्डी बढ़ जाती है और इससे पीड़ित मरीजों को देर तक बैठने में कठिनाई होती है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है...

एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में बढ़ जाती है रीढ़ की हड्डी, जानें इसके लक्षण और बचाव
एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Photo Credit- Getty Images)

नई दिल्ली:  एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing spondylitis) में रीढ़ की हड्डी बढ़ जाती है और इससे पीड़ित मरीजों को देर तक बैठने में कठिनाई होती है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है. इस रोग से पीड़ित मरीजों को चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है. हैरानी की बात यह है कि भारत में हर 100 लोगों में से एक आदमी एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस पीड़ित है और इस रोग की शिकायत ज्यादातर किशोरों और 20 से 30 साल की उम्र में होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के दर्द की शिकायत करने वाले गठिया के मरीज काफी कठिनाइयों में जिंदगी बिताते हैं. एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के इलाज की उचित व्यवस्था न होने से उनकी दशा और खराब हो जाती है. यह बात रूमैटोलॉजी के भारतीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में भी कही गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन की गुणवत्ता (डब्ल्यूएचओ क्यूओएल-बीईआरएफ) सूचकांक यह दर्शाता है एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के मरीजों की जिंदगी में शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस सूजन-संबंधी और ऑटोइम्यून बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है. एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित युवाओं की अकादमिक और पेशेवर प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी मानसिक सेहत भी प्रभावित होती है.

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विशेषज्ञों की माने तो देश में एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के करीब 10 लाख मरीज हैं, जबकि इससे पीड़ित अनेक मरीजों के वास्तविक आंकड़े प्रकाश में नहीं आते हैं, क्योंकि वे इससे बीमारी से अनजान हैं. एक अध्ययन में बताया गया है कि हालांकि नॉनस्टेरॉइडल एंटी इनफ्लेमेटरी ड्रग्स जिसे आम बोलचाल की भाषा में पेनकिलर्स कहा जाता है, को एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के मरीज ज्यादा इस्तेमाल करते हैं.

एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के ज्यादातर मरीज पेनकिलर लेने के बावजूद हड्डियों की अकड़न और दर्द से जूझते रहते हैं, जिससे शरीर की संरचना को नुकसान पहुंचता है और जोड़ों में सूजन के कारण रीढ़ की हड्डी बहुत सख्त हो जाती है. यह विकलांगता का का कारण बनता है और मरीज को अपनी जिंदगी की गुणवत्ता (क्यूओएल) से समझौता करना पड़ता है. इससे निजात पाने के लिए एडवांस्ड थेरेपी प्रभावी होती है.

चेन्नई के स्टेनले मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रूमैटोलॉजिस्ट डॉ. एम. हेमा ने कहा, "जिंदगी को बेहतरीन और खूबसूरत अंदाज में जीना एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के ज्यादातर मरीजों के सामने एक चुनौती है. उन्होंने कहा, "एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज नहीं होने से मरीजों को चलने-फिरने में तकलीफ हो सकती है. उनको अपनी दिनचर्या के कामों को करने में परेशानी हो सकती है और दफ्तर में लंबे समय तक बैठने में कठिनाई हो सकती है, जिससे मरीज की जिंदगी की गुणवत्ता असर पड़ता है." उन्होंने कहा, "भारत में इसके इलाज के बेहतर विकल्प जैसे बायोलॉजिक्स मौजूद हैं, जो हड्डियों के बीच किसी और हड्डी को बनने से रोकते हैं."

नई दिल्ली में एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दानवीर भादू ने कहा, "एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक पुरानी और शरीर में कमजोरी लाने वाली बीमारी है. हालांकि, अलग-अलग कारणों से मरीजों को इसके बेहतर इलाज के विकल्प नहीं मिल पाते. बायोलॉजिक थेरेपी अपनाकर हम शरीर की संरचनात्मक प्रक्रिया में नुकसान को कम से कम कर सकते है और मरीजों में चलने-फिरने की स्थिति में सुधार कर सकते हैं."

उन्होंने कहा, "कई मरीज रीढ़ की हड्डी, घुटनों और जोड़ों में दर्द के इलाज के लिए अन्य तरीके अपनाने लगते हैं, जिससे लंबी अवधि बीतने के बाद भी मरीजों को रोग में कोई आराम नहीं होता है. मरीजों में एलोपैथिक दवा के साइड इफेक्ट्स का डर और गैर-पारंपरिक दवाइयों की शाखा जैसे होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी जैसी चिकित्सा पर विश्वास अब भी बना है. वैकल्पिक दवाएं लेने से रीढ़ की हड्डी के बीच कोई और हड्डी पनपने का खतरा रहता है, जिससे वह पूरी तरह सख्त हो सकती है और मरीज के व्हील चेयर पर आने का खतरा बना रहता है."

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 31, 2019 10:37 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).