Crisil Report: मार्च में वेज थाली की कीमतें रहीं स्थिर, चिकन सस्ता होने से नॉन-वेज थाली की लागत में आई गिरावट
शाकाहारी और मांसाहारी थाली (Photo Credits: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: देश में आम आदमी की रसोई के बजट को लेकर क्रिसिल इंटेलिजेंस (Crisil Intelligence) ने सोमवार को अपनी मासिक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी (Home-Cooked Vegetarian) यानी वेज थाली (Veg Thali) की औसत कीमत पिछले साल के इसी महीने के बराबर रही. दूसरी ओर, मांसाहारी (नॉन-वेज) (Non Veg) थाली की लागत में सालाना आधार पर 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई है. इसका मुख्य कारण चिकन की कीमतों में आई कमी है, जो नॉन-वेज थाली की कुल लागत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा होता है. यह भी पढ़ें: Swiggy Hikes Platform Fees: गैस संकट के बीच Zomato के बाद स्विगी ने भी बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना हुआ और महंगा

सब्जियों के दामों का मिला-जुला असर

शाकाहारी थाली की कीमत स्थिर रहने के पीछे मुख्य कारण प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई गिरावट रही, जिसने टमाटर, खाद्य तेल और ईंधन की बढ़ती लागत को संतुलित कर दिया.

  • टमाटर: मार्च 2025 में 21 रुपये प्रति किलो की तुलना में मार्च 2026 में टमाटर के दाम 33 प्रतिशत बढ़कर 28 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में देरी से रोपाई के कारण फसल के उत्पादन पर असर पड़ा है.
  • प्याज और आलू: प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की कमी आई है, क्योंकि बाजार में खरीफ और रबी दोनों फसलों की आवक एक साथ होने से आपूर्ति अधिशेष (Supply Surplus) की स्थिति बन गई। कमजोर मांग के चलते आलू की कीमतें भी नीचे रहीं.
  • दालें: मौजूदा वित्त वर्ष में स्टॉक अधिक होने के कारण दालों की कीमतों में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के कारण खाना पकाने के तेल (वनस्पति तेल) की कीमतों में 6 प्रतिशत का उछाल आया है. वहीं, रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भी सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा ने बताया, 'पश्चिम एशिया के संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर पाम और सूरजमुखी तेल के दाम बढ़े हैं. इसका सीधा असर घरेलू बाजारों पर पड़ रहा है. आने वाले समय में भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण खाद्य तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं.' यह भी पढ़ें: Zero-gas commercial kitchen: रेस्टोरेंट मालिकों के लिए खुशखबरी, 'जीरो-गैस' किचन स्ट्रैटेजी से बचाएं हजारों रुपये; जानें कैसे काम करता है इलेक्ट्रिक मॉडल

आगे कैसा रहेगा रुझान?

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों में धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है. गर्मियों की फसल को हुए नुकसान और उत्पादन में अनुमानित 10 प्रतिशत की कमी के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, नेफेड (NAFED) के हस्तक्षेप या निर्यात में फिर से तेजी आने पर बाजार को सहारा मिल सकता है.

क्रिसिल की यह रिपोर्ट उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित इनपुट कीमतों के आधार पर तैयार की गई है, जो सीधे तौर पर आम आदमी के मासिक खर्च को प्रभावित करती है. इसमें अनाज, दालें, सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और कुकिंग गैस जैसे बुनियादी घटकों को शामिल किया गया है.