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RBI Repo Rate Cut: आरबीआई की मौद्रिक नीति रेपो दर में कोई बदलाव नहीं, स्थिरता पर जोर

रेपो दर में कोई बदलाव न होने से उन उधारकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली है जो कम ब्याज दरों की उम्मीद कर रहे थे. हालांकि, यह निर्णय वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के आरबीआई के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है. विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई भविष्य में दरों में कटौती पर विचार कर सकता है, लेकिन यह मुद्रास्फीति के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा.

RBI Repo Rate Cut: आरबीआई की मौद्रिक नीति रेपो दर में कोई बदलाव नहीं, स्थिरता पर जोर
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RBI Repo Rate Cut: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में प्रमुख नीतिगत दर, रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है. यह लगातार कई बार है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जो वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति को लक्षित सीमा के भीतर रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. इस निर्णय से बाजार में एक निश्चितता का माहौल बना हुआ है, हालांकि उद्योग जगत दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा था ताकि आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिल सके. RBI Repo Rate Cut: क्या सस्ती होगी आपके लोन की EMI? आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की पहली नीतिगत बैठक कल

वर्तमान रेपो दर और एमपीसी का रुख

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.50% पर बनाए रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 6.25% और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर तथा बैंक दर 6.75% पर बनी हुई है. एमपीसी ने 'समायोजन की वापसी' के रुख को भी बरकरार रखा है, जिसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक अभी भी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर तरलता को समायोजित करने के लिए तैयार है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य के करीब लाना है.

आर्थिक परिदृश्य और मुद्रास्फीति की चुनौतियां

आरबीआई का यह निर्णय वैश्विक और घरेलू आर्थिक कारकों के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद आया है. वैश्विक स्तर पर, भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं. घरेलू मोर्चे पर, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति अभी भी एक चिंता का विषय है. एमपीसी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.0% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 4.5% रहने का अनुमान है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और केंद्रीय बैंक सतर्क रहेगा.

आगे की राह और बाजार की उम्मीदें

रेपो दर में कोई बदलाव न होने से उन उधारकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली है जो कम ब्याज दरों की उम्मीद कर रहे थे. हालांकि, यह निर्णय वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के आरबीआई के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है. विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई भविष्य में दरों में कटौती पर विचार कर सकता है, लेकिन यह मुद्रास्फीति के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा. केंद्रीय बैंक का ध्यान अब यह सुनिश्चित करने पर है कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी रहे, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए एक स्थिर वातावरण तैयार हो सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 05, 2026 12:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).