मुंबई: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय द्विमासिक बैठक कल से शुरू हो गई है. इस छह सदस्यीय समिति की बैठक में देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति (महंगाई) और विकास दर के आंकड़ों पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है. बैठक के नतीजों और ब्याज दरों पर लिए गए फैसले की घोषणा कल सुबह की जाएगी.
ब्याज दरों में बदलाव की संभावना
बाजार विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करेगा या इसे यथावत रखेगा. पिछले कुछ समय से खुदरा महंगाई दर में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसे देखते हुए समिति का रुख काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखता है, तो होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा.
गवर्नर के रूप में पहली बड़ी परीक्षा
संजय मल्होत्रा के लिए गवर्नर के तौर पर यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा है. उनकी अध्यक्षता वाली इस समिति में तीन आंतरिक सदस्य और तीन बाहरी सदस्य शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि समिति विकास को गति देने और महंगाई को नियंत्रित करने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी. कल सुबह होने वाली घोषणा में केवल ब्याज दरों ही नहीं, बल्कि भविष्य के आर्थिक परिदृश्य (Economic Outlook) पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी मिल सकती है.
बैठक का एजेंडा और मुख्य बिंदु
बैठक के दौरान समिति कई प्रमुख कारकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है:
महंगाई दर: खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर प्रभाव.
जीडीपी ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमानों की समीक्षा.
वैश्विक प्रभाव: अमेरिका के फेडरल रिजर्व के फैसलों और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों का भारतीय बाजार पर असर.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति हर दो महीने में अर्थव्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक करती है. रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है. इस दर में बदलाव का सीधा असर बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ता है.
कल सुबह जब गवर्नर संजय मल्होत्रा मीडिया को संबोधित करेंगे, तब देश के वित्तीय बाजारों और आम जनता को अपनी वित्तीय योजनाओं के लिए एक नई दिशा मिलेगी.













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