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मध्य पूर्व में भारी तनाव: इजरायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर किया हमला, ट्रंप प्रशासन की मंजूरी के बाद बढ़ी क्षेत्रीय युद्ध की आशंका (Watch Video)

इजरायली वायुसेना ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र 'साउथ पार्स गैस फील्ड' पर सीधा हमला किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की हरी झंडी के बाद हुई इस कार्रवाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.

मध्य पूर्व में भारी तनाव: इजरायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर किया हमला, ट्रंप प्रशासन की मंजूरी के बाद बढ़ी क्षेत्रीय युद्ध की आशंका (Watch Video)
साउथ पार्स गैस फील्ड (Photo Credits: X\@aryabhardwaj)

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष (Middle East Conflict) अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इजरायली वायुसेना (Israeli Air Force) ने ईरान के आर्थिक और ऊर्जा आधार स्तंभ 'साउथ पार्स गैस फील्ड' (South Pars Gas Field) को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला किया है. यह पहली बार है जब इजरायल (Israel) ने ईरान (Iran) के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर सीधा प्रहार किया है. दो वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस ऑपरेशन को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन की मंजूरी के बाद अंजाम दिया गया है, जो अमेरिका और इजरायल के बीच अभूतपूर्व समन्वय और इस संघर्ष में वाशिंगटन की गहरी भूमिका का संकेत देता है. यह भी पढ़ें: Middle East Conflict: दुबई एयरपोर्ट के पास ईरानी ड्रोन हमला, एक भारतीय सहित 4 घायल; मध्य पूर्व में युद्ध तेज

असालुयेह में मची तबाही और भारी नुकसान

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असालुयेह (Asaluyeh) स्थित कई गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स पर मिसाइलें गिरीं, जिससे पूरे संयंत्र में भीषण आग लग गई. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में आसमान में उठते धुएं के विशाल गुबार देखे जा सकते हैं। ईरानी सरकार ने इस हमले के लिए "अमेरिकी-ज़ायोनी दुश्मन" को जिम्मेदार ठहराया है. साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक है और ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जिससे यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

साउथ पार्स गैस क्षेत्र में हड़ताल से क्षेत्र में हड़कंप

सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव

यह हमला इजरायल की सैन्य रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. अब तक इजरायल केवल सैन्य ठिकानों या ठिकानों को ही निशाना बनाता था, लेकिन अब उसने आर्थिक जीवन रेखाओं पर प्रहार करना शुरू कर दिया है. इससे पहले वैश्विक बाजार में गिरावट और तेल-गैस की कीमतों में उछाल के डर से ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने से परहेज किया जाता था.

खाड़ी देशों में अलर्ट और ईरान की चेतावनी

हमले के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. साथ ही, तेहरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे पड़ोसी देशों को भी अपने ऊर्जा संपत्तियों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है. यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा

वैश्विक बाजार और मानवीय चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के दूरगामी परिणाम होंगे. गैस संयंत्र के क्षतिग्रस्त होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले एक विवादित विषय हैं, खासकर यदि इससे आम जनता की बिजली और ईंधन आपूर्ति पर बड़ा प्रभाव पड़ता है.

जैसे-जैसे साउथ पार्स में आग की लपटें तेज हो रही हैं, दुनिया की नजरें अब ईरान की अगली प्रतिक्रिया और अमेरिका के रुख पर टिकी हैं. जो अब तक एक परोक्ष युद्ध (Shadow Conflict) था, वह अब एक पूर्ण क्षेत्रीय संकट में तब्दील होने की कगार पर है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 18, 2026 09:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).