20 मई की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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आखिरकार ईयू ने मानी अमेरिका की बात, उसकी शर्तों पर किया व्यापार समझौता

साल के अंत तक वतन वापसी करेंगे करीब 30 लाख अफगान नागरिक: यूएन

चीन पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, रूस-चीन के रिश्ते सबसे मजबूत

नाटो में सैन्य भूमिका घटाने की तैयारी में अमेरिका: रॉयटर्स

महिला वकीलों के लिए 30 फीसदी आरक्षण की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि सरकारी न्यायिक अधिकारी के पदों पर महिला वकीलों को 30 फीसदी आरक्षण दिया जाए. साथ ही केंद्र, राज्यों और सरकारी कंपनियों के वकीलों के पैनलों में भी महिलाओं को 30 फीसदी हिस्सेदारी दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दिया है.

कानूनी खबरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि अभी तक कोई भी महिला वकील भारत की अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल नियुक्त नहीं की गई है. इसके अलावा विभिन्न हाईकोर्टों में नियुक्त किए गए एडिशनल सॉलिसिटर जनरलों में भी कोई महिला वकील शामिल नहीं है. याचिका में कहा गया है कि न्यायिक पदों पर महिलाओं के न होने से न्यायापालिका में उनकी हिस्सेदारी पर सीधा असर पड़ता है.

यह याचिका लाड़ली फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा दायर की गई थी, जो समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए काम करता है. याचिका में कहा गया है कि सरकारी पैनलों और न्यायिक पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम है. याचिका के मुताबिक, देश में करीब 15.40 लाख वकील पंजीकृत हैं, जिनमें से महिला वकील केवल 2.84 लाख हैं, जो कुल संख्या का मात्र 15.31 फीसदी हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, समर्थन घटा

रॉयटर्स/इप्सोस के नए सर्वे के अनुसार डॉनल्ड ट्रंप की लोकप्रियता, राष्ट्रपति के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल में लगभग सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. केवल 35 प्रतिशत लोगों ने उनके कार्य प्रदर्शन को मंजूरी दी, जो इस महीने की शुरुआत के सर्वे से एक प्रतिशत कम है और पिछले महीने दर्ज 34 प्रतिशत के बहुत करीब है. जनवरी 2025 में उनके कार्यकाल की शुरुआत 47 प्रतिशत समर्थन के साथ हुई थी. गिरावट का मुख्य कारण रिपब्लिकन समर्थन में कमी बताया गया है.

फरवरी में ईरान पर इस्राएलके साथ किए गए हमलों के बाद वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित हुआ, जिससे पेट्रोल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि हुई और महंगाई बढ़ी. इसका असर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी दिखा, जहां 21 प्रतिशत लोग अब ट्रंप के प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं, जबकि शुरुआत में यह केवल 5 प्रतिशत था. पार्टी समर्थन 79 प्रतिशत रह गया, जो पहले 82 और शुरुआत में 91 प्रतिशत था. जीवन-यापन की लागत पर लगभग आधे रिपब्लिकन समर्थन और आधे असंतोष में बंटे दिखे, जबकि कुल अमेरिकी जनता में केवल पांच में से एक ने मंजूरी दी.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन मतदाताओं में उत्साह की कमी का संकेत हो सकती है, हालांकि अब भी लगभग पांच में से चार रिपब्लिकन उनका समर्थन करते हैं. आव्रजन नीति पर उनका समर्थन मजबूत बना हुआ है, जिसमें लगभग 82 प्रतिशत रिपब्लिकन इसे सही मानते हैं.

अमेरिका को जन्मदिन की बधाई क्यों दे रहे भारत के ऑटो रिक्शा

भारत की राजधानी नई दिल्ली की सड़कों पर अमेरिका को जन्मदिन की बधाई देते ऑटो-रिक्शा नजर आएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. यह भारत में अमेरिकी दूतावास की एक पहल का हिस्सा है. इसके तहत करीब 100 ऑटो-रिक्शा के पिछले हिस्से पर अमेरिका को जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं. इन पोस्टरों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तस्वीरें लगी हैं.

भारत में ऑटो-रिक्शा का पिछला हिस्सा अक्सर एक चलते-फिरते बिलबोर्ड का काम करता है. आमतौर पर इन पर फर्टिलिटी क्लीनिकों, लोन कंपनियों और आयुर्वेदिक दवाओं के विज्ञापन नजर आते हैं. ऐसे में अमेरिकी झंडे वाले पोस्टर तेजी से अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचते हैं. इन पोस्टरों पर “हैपी बर्थडे अमेरिका!” और “250 साल पुराना” लिखा नजर आता है.

अमेरिका इस साल 4 जुलाई को अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ मनाएगा. अमेरिका ने इसे अपने इतिहास का सबसे जरूरी मील का पत्थर बताया है. इसके लिए विभिन्न देशों में समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों की योजना बनाई गई है. इसी के तहत पिछले महीने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस अनोखे विज्ञापन अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें ऑटो-रिक्शा पर बधाई संदेश लगाए गए.

चीन ने अमेरिका से की 'व्यापारिक युद्धविराम’ को आगे बढ़ाने की मांग

चीन ने बुधवार, 20 मई को कहा कि वह अमेरिकी विमान कंपनी बोइंग से 200 विमान खरीदेगी. साथ ही अमेरिका से पिछले साल हुए ‘व्यापारिक युद्धविराम’ को आगे बढ़ाने की मांग करेगी. इस समझौते के तहत अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर टैरिफ घटाए थे और चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स और मैग्नेट्स के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को रोक दिया था. हाल ही में अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन इस समझौते को आगे बढ़ाने की “जल्दी में नहीं” है. यह समझौता इस साल नवंबर में खत्म होना है.

चीन की यह घोषणा पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के चीन दौरे के बाद आयी है. चीन दौरा खत्म होने के बाद ट्रंप ने कहा था कि चीन बोइंग से 750 विमान तक खरीद सकता है लेकिन चीन ने फिलहाल 200 विमान खरीदने की ही बात कही है. इस खरीद पर अंतिम मुहर लगने की स्थिति में यह इस दशक में चीन के साथ बोइंग की पहली बड़ी डील होगी. अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव होने के चलते चीनी बाजार से बोइंग की लगभग छुट्टी हो गई थी.

अमेरिका ने रविवार को एक फैक्ट शीट जारी कर कहा था कि चीन साल 2026 से 2028 तक अमेरिका से 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदेगा. यह सोयाबीन खरीद की मौजूदा प्रतिबद्धता से अलग होगा. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है लेकिन कहा है कि दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में सकारात्मक नतीजे हासिल किए और पारस्परिक बाजार पहुंच पर समझौते किए.

चीन पहुंचे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, रूस-चीन के रिश्ते सबसे मजबूत

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान कहा कि दोनों देशों के संबंध “अभूतपूर्व रूप से ऊंचे स्तर” पर पहुंच गए हैं. दोनों नेताओं की मुलाकात चीन-रूस की 'ट्रीटी ऑफ गुड नेबरलीनेस एंड फ्रैंडली कोऑपरेशन' के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हुई. बीजिंग के ग्रेट हॉल में शी जिनपिंग ने भी दोनों देशों के रिश्तों को “अटल” बताया और सहयोग बढ़ाने की बात कही.

शी जिनपिंग ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और दुनिया के महत्वपूर्ण देशों के रूप में चीन और रूस को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. दोनों देशों को उच्च स्तर के रणनीतिक सहयोग के जरिए अपने विकास को आगे बढ़ाना चाहिए और वैश्विक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाना चाहिए.”

पुतिन मंगलवार रात चीन पहुंचे थे. उनका स्वागत चीन के विदेश मंत्री वांग यी, सम्मान गार्ड और रूसी व चीनी झंडे लहराते युवाओं ने किया. युवाओं ने “स्वागत, स्वागत, हार्दिक स्वागत” के नारे लगाए.

रूस और चीन के बीच व्यापार और ऊर्जा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. रूस ने बताया कि 2026 की पहली तिमाही में चीन को तेल निर्यात 35 प्रतिशत बढ़ा. दोनों नेता यूक्रेन, ईरान, ऊर्जा संकट और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे.

आर्सेनल ने 22 साल बाद प्रीमियर लीग खिताब जीता, नॉर्थ लंदन में जश्न

नॉर्थ लंदन की सड़कों पर मंगलवार को आर्सेनल के हजारों समर्थक उमड़ पड़े, जब क्लब ने 22 सालों बाद अपना पहला प्रीमियर लीग खिताब जीत लिया. यह खिताब बिना मैच खेले ही पक्का हो गया, जब दूसरे स्थान पर रही मैनचेस्टर सिटी ने बोर्नमाउथ के साथ 1-1 से ड्रा खेला. आर्सेनल के खिलाड़ी लंदन के उत्तर में स्थित अपने प्रशिक्षण स्थल पर मैच देख रहे थे और सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में वे खिताब तय होते ही खुशी से उछलते और एक-दूसरे को गले लगाते दिखाई दिए.

एमिरेट्स स्टेडियम के बाहर प्रशंसक जुटे. उन्होंने आतिशबाजी की और मशालें जलाईं और ‘चैंपियंस! चैंपियंस! ओले! ओले! ओले!’ के नारे लगाए. एक प्रशंसक ने रॉयटर्स से कहा, “शब्दों में इसे बयान नहीं किया जा सकता, हम 22 वर्षों से इंतजार कर रहे थे, यह अविश्वसनीय है. बोर्नमाउथ ने हमारी मदद की, वे बहुत अच्छा खेले और हम एक काबिल चैंपियन हैं, यह खुशी का दिन है.” आर्सेनल के पूर्व दिग्गज इयान राइट भी पहुंचे और प्रशंसकों ने उनके नाम के नारे लगाए.

राइट ने कहा, “मैं बहुत खुश था. मैं टैक्सी में बैठा, अपनी पत्नी और बेटियों को साथ लिया और कहा, हम एमिरेट्स चलें. यह अद्भुत है, यह क्लब इसके योग्य है, हमारे प्रशंसक इसके हकदार हैं.' आर्सेनल रविवार को क्रिस्टल पैलेस के खिलाफ अंतिम मैच खेलेगा और 30 मई को पेरिस सेंट जर्मेन के खिलाफ चैंपियंस लीग फाइनल होगा.

नाटो में सैन्य भूमिका घटाने की तैयारी में अमेरिका: रॉयटर्स

अमेरिका की ट्रंप सरकार इस सप्ताह नाटो सहयोगियों को बता सकती है कि वह बड़े संकट या युद्ध की स्थिति में यूरोपीय देशों की मदद के लिए उपलब्ध अपने सैन्य संसाधनों को कम करेगी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, इस फैसले की औपचारिक जानकारी शुक्रवार को ब्रसेल्स में रक्षा नीति प्रमुखों की बैठक में दी जाएगी. नाटो बल मॉडल के तहत सदस्य देश उन सैन्य बलों की सूची तैयार रखते हैं जिन्हें किसी युद्ध या बड़े संकट के समय सक्रिय किया जा सकता है.

रॉयटर्स के सूत्रों ने उन्हें बताया कि पेंटागन ने इस मॉडल के तहत अपनी प्रतिबद्धता को काफी घटाने का फैसला किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभालनी चाहिए. अमेरिका का कहना है कि वह परमाणु सुरक्षा कवच जारी रखेगा, लेकिन पारंपरिक सैन्य जिम्मेदारियों में यूरोपीय देशों को आगे आना होगा.

नाटो के भीतर इस फैसले को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई यूरोपीय देशों को डर है कि अमेरिका भविष्य में गठबंधन से दूरी बना सकता है. हाल के हफ्तों में ट्रंप सरकार ने यूरोप से लगभग पांच हजार अमेरिकी सैनिक कम करने और पोलैंड में सेना की तैनाती रद्द करने की घोषणा भी की है. यूरोपीय देशों का कहना है कि वे अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहे हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा.

साल के अंत तक वतन वापसी करेंगे करीब 30 लाख अफगान नागरिक: यूएन

संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि उनका अनुमान है कि इस साल के अंत तक करीब 30 लाख अफगान नागरिक अपने देश वापस लौटेंगे और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे और महिलाएं होंगी. सितंबर, 2023 से लेकर अब तक करीब 59 लाख अफगान नागरिक देश वापस लौट चुके हैं. इनमें से ज्यादातर पड़ोसी देश पाकिस्तान और ईरान से वापस आए हैं. यह संख्या अफगानिस्तान की कुल आबादी की करीब 10 फीसदी है.

यूएन के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में करीब छह लाख अफगान ईरान और पाकिस्तान से वापस लौट चुके हैं. अगले आठ महीनों में दोनों देशों से करीब 28 लाख अफगान नागरिकों के और लौटने का अनुमान है. अफगानिस्तान लौटने वाले ज्यादातर लोग कुशल श्रमिक हैं, जो पड़ोसी देशों में ही पैदा हुए और पले-बढ़े या वे लंबे समय से अपने समुदायों से दूर हैं.

अफगानिस्तान लौटने वाले लोगों में आधे से ज्यादा बच्चे और महिलाएं हैं, जो देश में सबसे ज्यादा असुरक्षित वर्ग है. यूएन और अन्य सहायता संगठन इनकी मदद के लिए अधिक आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं. हालांकि, इसी हफ्ते आयी एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि मानवीय सहायता में साल 2024 से साल 2025 के बीच करीब 45 फीसदी की गिरावट आई है.

आखिरकार ईयू ने मानी अमेरिका की बात, उसकी शर्तों पर किया व्यापार समझौता

यूरोपीय संघ के राजनयिकों और सांसदों ने मंगलवार देर रात अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लागू करने पर सहमति बना ली. इस समझौते के तहत यूरोप में आयात होने वाले अधिकांश अमेरिकी औद्योगिक सामानों पर शुल्क खत्म किया जाएगा. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने यूरोपीय कारों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर 4 जुलाई तक समझौता लागू नहीं हुआ तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा. यह समझौता पिछले वर्ष स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन के बीच हुआ था.

“टर्नबेरी समझौता” नाम के इस समझौते की कई यूरोपीय सांसदों ने आलोचना की. उनका कहना है कि यह समझौता संतुलित नहीं है क्योंकि इससे यूरोपीय सामानों पर अमेरिकी शुल्क 15 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. साइप्रस के व्यापार मंत्री माइकल डामियानोस ने कहा, “यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ आर्थिक संबंध है. स्थिर, भरोसेमंद और संतुलित साझेदारी दोनों पक्षों के हित में है. आज यूरोपीय संघ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है.”

यूरोपीय सांसदों ने पहले इस समझौते को रोक दिया था. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों और अमेरिका द्वारा नए शुल्क लागू किए जाने पर विरोध जताया था. बाद में यूरोपीय आयोग ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका अपने हिस्से की शर्तों का पालन करेगा और शुल्क 15 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाएगा.

यूरोपीय संघ और अमेरिका के संबंध अब भी नाजुक बने हुए हैं. ब्रसेल्स में चिंता है कि अमेरिका भविष्य में भी शुल्क का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर सकता है. ईरान युद्ध, यूक्रेन, रूसी तेल और नाटो जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों में मतभेद जारी हैं. समझौते के तहत यूरोपीय संघ ने 2028 तक अमेरिका के रणनीतिक क्षेत्रों में 600 अरब डॉलर निवेश करने और 750 अरब डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा खरीदने की भी प्रतिबद्धता जताई है.

मोदी और मेलोनी की मुलाकात, भारत-इटली की दोस्ती बढ़ाने पर जोर

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं. वे मंगलवार, 19 मई को इटली की राजधानी रोम में उतरे, जहां उनका स्वागत किया गया. इसके बाद उन्होंने डिनर पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए. डिनर के बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध इमारत कोलोसिमय का भी दौरा किया.

पीएम मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने लिखा, “आज होने वाली बातचीत के लिए उत्सुक हूं, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को बढ़ावा देने के तरीकों पर अपने संवाद को जारी रखेंगे.” इसी पोस्ट में उन्होंने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपनी कुछ तस्वीरें भी साझा कीं.

एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने बताया कि उनका यह दौरा भारत-इटली के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा, खासतौर से इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पर. उन्होंने बताया कि इस दौरान संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 की भी समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा पीएम मोदी खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे.