RBI Monetary Policy: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, होम और कार लोन की EMI कम होने के लिए अभी करना होगा इंतजार
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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी नवीनतम बैठक में प्रमुख नीतिगत दर, रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है. इस घोषणा के साथ, रेपो रेट 6.50% पर बरकरार है, जिससे उन लाखों उधारकर्ताओं को निराशा हुई है जो अपनी मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी की उम्मीद कर रहे थे. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि समिति ने "समायोजन की वापसी" (withdrawal of accommodation) के रुख को भी बनाए रखा है, जो यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अभी भी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

स्थिरता का कारण: मुद्रास्फीति पर नियंत्रण प्राथमिकता

RBI Monetary Policy: आरबीआई के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने की निरंतर प्राथमिकता है. गवर्नर दास ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मुद्रास्फीति का दबाव बना हुआ है. एमपीसी का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में दरों में कटौती से मुद्रास्फीति फिर से बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. समिति ने यह भी संकेत दिया कि वे तब तक दरों में कटौती पर विचार नहीं करेंगे जब तक कि मुद्रास्फीति 4% के लक्ष्य के करीब स्थिर न हो जाए.

आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिदृश्य

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7% पर बरकरार रखा है, जो मजबूत घरेलू मांग और निवेश गतिविधियों को दर्शाता है. हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि शामिल है. इन कारकों को ध्यान में रखते हुए, आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाना उचित समझा है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सके.

ईएमआई पर तत्काल प्रभाव और भविष्य की उम्मीदें

रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का सीधा मतलब है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में तत्काल कोई कमी नहीं आएगी. उधारकर्ताओं को अपनी ईएमआई कम होने के लिए अभी और इंतजार करना होगा. विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई अगले कुछ महीनों तक दरों को स्थिर रख सकता है, और दरों में कटौती की संभावना तभी बनेगी जब मुद्रास्फीति लगातार लक्ष्य सीमा के भीतर बनी रहे और आर्थिक वृद्धि स्थिर रहे. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत तक दरों में मामूली कटौती देखने को मिल सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा.

निष्कर्ष

आरबीआई की नवीनतम मौद्रिक नीति घोषणा ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय बैंक का प्राथमिक ध्यान अभी भी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर है. रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से उधारकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिली है, लेकिन यह अर्थव्यवस्था के लिए एक सतर्क और स्थिर दृष्टिकोण को दर्शाता है. भविष्य में ईएमआई में कमी की उम्मीदें मुद्रास्फीति के रुझान और वैश्विक आर्थिक विकास पर निर्भर करेंगी.