RBI MPC Meeting: 6 फरवरी को आएगा बड़ा फैसला, रेपो रेट स्थिर रहने के आसार, EMI में तुरंत राहत की उम्मीद कम
Loan EMI होगी कम? सिर्फ आज भर का इंतजार... कल RBI करेगा बड़ा ऐलान

मुंबई: देश के लाखों कर्जदारों की निगाहें कल, 6 फरवरी 2026, शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बड़े ऐलान पर टिकी हैं. केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार, 4 फरवरी को शुरू हुई थी, जिसका समापन कल होगा. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे, जिसके बाद दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. हालांकि, व्यापक उम्मीद यह है कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि आपकी मासिक किस्त (EMI) में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है. RBI Repo Rate Cut: आरबीआई की मौद्रिक नीति रेपो दर में कोई बदलाव नहीं, स्थिरता पर जोर

क्या कम होगी आपकी EMI?

विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का एक बड़ा वर्ग यह अनुमान लगा रहा है कि आरबीआई इस मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखेगा. यदि ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई तत्काल कमी नहीं आएगी. पिछले साल, 2025 में, आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 125 आधार अंकों (1.25%) की कटौती की थी, जिससे यह 5.25% पर आ गया था. अब केंद्रीय बैंक का ध्यान पिछली कटौतियों के प्रभाव का आकलन करने और अर्थव्यवस्था में तरलता (लिक्विडिटी) प्रबंधन पर अधिक है.

पिछली कटौतियों का असर और वर्तमान आर्थिक परिदृश्य

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की यह बैठक केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा और हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद हो रही है।. इन घटनाक्रमों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और घरेलू बॉन्ड यील्ड पर दबाव जैसे कारक आरबीआई को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं. मुद्रास्फीति के मिश्रित संकेत भी दरों को स्थिर रखने के पक्ष में हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला में महंगाई के आंकड़े ऊपर जा सकते हैं, जिससे आरबीआई और जोखिम लेने से बचेगा.

आगे की राह: 'वेट एंड वॉच' की रणनीति

डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के बजट में भारी उधारी का खाका खींचा गया है, ऐसे में केंद्रीय बैंक उधारी लागत को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रहेगा. आरबीआई ने हाल ही में बैंकिंग सिस्टम में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी डालने के उपायों की भी घोषणा की है. इन परिस्थितियों को देखते हुए, मौद्रिक नीति समिति के रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने की उम्मीद है. यह 'वेट एंड वॉच' की रणनीति का संकेत होगा, जहां केंद्रीय बैंक पहले की गई कटौतियों के असर का आकलन करेगा और भविष्य में डेटा-आधारित फैसलों पर जोर देगा.

कल होने वाली घोषणा न केवल कर्जदारों के लिए, बल्कि पूरे वित्तीय बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगी. हालांकि, तत्काल EMI राहत की उम्मीदें कम हैं, लेकिन आरबीआई का यह फैसला देश की आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा को स्पष्ट करेगा.