Municipal Corporation Elections 2026: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए 15 जनवरी को सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान

Municipal Corporation Elections 2026: आगामी नगर निगम चुनावों, विशेषकर बहुचर्चित बीएमसी इलेक्शन 2026 में अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार यानी 15 जनवरी 2026 को राज्य के चुनिंदा ज़िलों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इस निर्णय की पुष्टि राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने की है, जो राज्य की 29 नगर निगमों में होने वाले मतदान की निगरानी करेगा. BMC Election 2026: मुंबई के चुनावी रण में अब 1,700 उम्मीदवार; जांच और नाम वापसी के बाद अंतिम तस्वीर साफ

यह अवकाश संबंधित मतदान क्षेत्रों के राज्य एवं अर्ध-सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और नगर निकायों पर लागू होगा. साथ ही निजी कंपनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कर्मचारियों को वेतन सहित अवकाश या पर्याप्त समय देने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि वे मतदान कर सकें. यह प्रावधान महाराष्ट्र दुकाने एवं प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत लागू होगा.

बीएमसी चुनावों पर सबकी नज़र

चुनावों में सबसे अधिक सुर्खियां बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों को लेकर हैं, जो मुंबई की सबसे बड़ी शासकीय इकाई है. बीएमसी 2022 से प्रशासक शासन के अधीन है, ऐसे में बीएमसी इलेक्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

लगभग 74,000 करोड़ से अधिक के बजट के साथ बीएमसी को देश की सबसे समृद्ध नगर निगम माना जाता है. इसके साथ ही पुणे, ठाणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी मतदान होगा, जिससे चुनावों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है.

राजनीतिक समीकरण और गठबंधन

यह पोल मौजूदा महाायुक्ति (Mahayuti) गठबंधन और विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. दल-बदल, गुटीय खींचतान और स्थानीय स्तर के समीकरणों के कारण, विशेषकर मुंबई में मुकाबला काफ़ी दिलचस्प हो गया है.

चुनाव कार्यक्रम और मुख्य तारीख

राज्य निर्वाचन आयुक्त डीके वाघमारे के अनुसार

मतदान तिथि: 15 जनवरी 2026

समय: सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक

वोटों की गिनती: 16 जनवरी 2026

मतदाता सूची: 1 जुलाई 2025 की आधार तिथि पर तैयार

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन वार्डों में केवल एक ही उम्मीदवार है, वहाँ मतदान नहीं होगा तथा उम्मीदवार को निर्विरोध विजयी घोषित किया जाएगा. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें NOTA विकल्प की मांग की है, लेकिन आयोग का कहना है कि वर्तमान कानून में इसका प्रावधान नहीं है.