Cheti Chand 2026 Messages In Hindi: सिंधी समुदाय के लिए आस्था और नए साल के स्वागत का पावन पर्व 'चेटी चंड' (Cheti Chand) इस वर्ष 19 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सिंधी संस्कृति की पहचान है. इसे 'झूलेलाल जयंती' (Jhulelal Jayanti) और 'सिंधी नववर्ष' (Sindhi New Year) के रूप में पूरे विश्व में बसे सिंधी समाज द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि भगवान झूलेलाल वरुण देव (जल के देवता) और ज्योति के अवतार हैं, जिनका अवतरण धर्म की रक्षा के लिए हुआ था.
चेटी चंड के दिन सिंधी समाज में 'बहिराणा साहब' की पूजा का विशेष महत्व है. श्रद्धालु लकड़ी का एक सुंदर मंदिर बनाते हैं, जिसमें जल से भरा लोटा और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है. भगवान झूलेलाल की प्रतिमा को शीश पर उठाकर पारंपरिक 'छेज' नृत्य करते हुए भव्य झांकियां निकाली जाती हैं. भक्त अपने आराध्य को उदेरोलाल, जिन्दपीर, लालसाईं और अमरलाल जैसे अनेक भक्तिमय नामों से पुकारते हैं.
सिंधी समुदाय के लोग चेटी चंड के पर्व को वरुण देव और ज्योति के अवतार भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के तौर पर पूरे भक्तिभाव के साथ मनाते हैं, साथ ही शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं. ऐसे में इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स और फोटो एसएमएस के जरिए अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से हैप्पी चेटी चंड कहकर सिंधी नववर्ष की बधाई दे सकते हैं.





इस पर्व से एक ऐतिहासिक और पौराणिक कथा जुड़ी है. संवत 1007 में सिंध के ठट्ठा नगर में मिरखशाह नामक शासक के अत्याचारों से हिंदू समुदाय त्रस्त था. लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा था. जब पीड़ितों ने सिंधु नदी के तट पर भगवान का स्मरण किया, तब आकाशवाणी हुई कि धर्म की रक्षा के लिए श्रीरतनराय और माता देवकी के घर स्वयं भगवान जन्म लेंगे.
बालक उदयचंद (झूलेलाल) के जन्म के बाद मिरखशाह ने उन्हें मारने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वह हर बार असफल रहा. अंततः भगवान झूलेलाल ने एक वीर सेना का गठन कर मिरखशाह को परास्त किया और लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई.
प्राचीन काल से ही सिंधी समुदाय व्यापारिक उद्देश्यों के लिए जलमार्गों का उपयोग करता रहा है. मान्यता है कि यात्रा पर निकलने से पहले लोग सकुशल वापसी के लिए भगवान झूलेलाल से प्रार्थना करते थे. यात्रा सफल होने पर वे जल देवता का आभार व्यक्त करते हुए चेटी चंड का उत्सव मनाते थे. आज भी यह माना जाता है कि उनकी पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.













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