हैदराबाद/बेंगलुरु: भारत के दक्षिण राज्यों में वसंत के आगमन और नए संवत्सर (New Year) के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस वर्ष 'उगादि' (Ugadi), जिसे 'युगादि' भी कहा जाता है, 19 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh), तेलंगाना (Telangana)और कर्नाटक (Karnataka) में यह पर्व नए चंद्र वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. इसी दिन महाराष्ट्र (Maharashtra) में गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) और सिंधी समुदाय में चेटी चंड (Cheti Chand) का उत्सव मनाया जाता है. यह त्योहार न केवल कैलेंडर के बदलाव का गवाह है, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है.
'उगादि' शब्द संस्कृत के 'युग' (एक कालखंड) और 'आदि' (शुरुआत) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है एक नए युग का प्रारंभ. ऐतिहासिक रूप से, 12वीं शताब्दी के महान भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य ने उगादि को नए साल की शुरुआत के रूप में मान्यता दी थी, क्योंकि यह दिन खगोलीय रूप से वसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के पुनर्जन्म को दर्शाता है.
उगादि का पर्व उत्तर भारत में मनाए जाने वाले 'चैत्र नवरात्रि' के साथ मेल खाता है. जहां दक्षिण में यह नए साल का उत्सव है, वहीं उत्तर भारत में यह देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत है. इस प्रकार, यह दिन पूरे भारत को एक सांस्कृतिक सूत्र में पिरोता है. इस अवसर पर आप इन शानदार ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ इमेजेस, एचडी वॉलपेपर्स के जरिए हैप्पी उगादि कह सकते हैं.





उगादि के दिन की शुरुआत 'तैल अभ्यंग' (तेल स्नान) से होती है. मान्यता है कि यह प्रक्रिया शरीर और आत्मा को शुद्ध करती है. इस दिन घरों को ताजे आम के पत्तों और रंगीन रंगोली से सजाया जाता है. मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं. एक महत्वपूर्ण परंपरा 'पंचांग श्रवणम' की है, जिसमें ज्योतिषी नए संवत्सर के आधार पर आने वाले वर्ष के भाग्य और ग्रहों की स्थिति की भविष्यवाणी करते हैं.













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