Gujarat HC On Asaram Bapu Land: गुजरात हाई कोर्ट ने अहमदाबाद के साबरमती क्षेत्र में स्थित आसाराम आश्रम के कब्जे वाली बेशकीमती जमीन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को वह 45,000 वर्ग मीटर जमीन वापस लेने की अनुमति दे दी है, जिसे वर्षों पहले आश्रम को दिया गया था. जस्टिस ए.एस. सुपेहिया की खंडपीठ ने आश्रम द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए सरकार की कार्रवाई को उचित ठहराया है.
क्या है जमीन विवाद का पूरा मामला?
यह मामला साबरमती नदी के किनारे स्थित लगभग 45,000 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है. राज्य सरकार ने दशकों पहले कुछ शर्तों के आधार पर यह जमीन आसाराम आश्रम को आवंटित की थी. हालांकि, बाद के वर्षों में जांच में पाया गया कि आश्रम ने जमीन आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया है. इसके बाद राज्य सरकार ने जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था और इसे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी.
आश्रम की दलीलों को कोर्ट ने किया खारिज
आसाराम आश्रम की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई थी कि वे वर्षों से इस जमीन का उपयोग कर रहे हैं और सरकार का जमीन वापस लेने का आदेश मनमाना है. उन्होंने तर्क दिया कि जमीन पर किए गए निर्माण और गतिविधियों से जनकल्याण हो रहा है.
हालांकि, सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह जमीन सार्वजनिक प्रयोजन के लिए थी और शर्तों के उल्लंघन के कारण आश्रम का इस पर कोई कानूनी हक नहीं रह जाता है. कोर्ट ने सरकारी दलीलों से सहमति जताते हुए आश्रम की अर्जी खारिज कर दी.
विवादों में रहा है साबरमती आश्रम
आसाराम के जेल जाने के बाद से ही उनके साबरमती स्थित मुख्य आश्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर रही है. इस जमीन के अलावा आश्रम पर अवैध अतिक्रमण और सरकारी नियमों की अनदेखी के कई अन्य आरोप भी लगते रहे हैं. प्रशासन ने इससे पहले भी जमीन के कुछ हिस्सों को खाली कराने की कोशिश की थी, लेकिन मामला अदालत में होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई थी.
आगे की प्रक्रिया
हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब अहमदाबाद जिला कलेक्टर और राजस्व विभाग जमीन का कब्जा लेने की तैयारी शुरू करेंगे. सूत्रों के अनुसार, प्रशासन जल्द ही आश्रम को जमीन खाली करने का औपचारिक नोटिस जारी कर सकता है. यदि आश्रम स्वेच्छा से जमीन नहीं छोड़ता है, तो बल प्रयोग कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है.













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