Independence Day 2021: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा- पिछले 75 वर्षो में विकास यात्रा में लम्बी दूरी तय की, अभी काफी आगे जाना है
स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दूरदर्शन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, असमानता से भरी विश्व व्यवस्था में और अधिक समानता के लिए तथा अन्यायपूर्ण परिस्थितियों में और अधिक न्याय के लिए, दृढ़तापूर्वक प्रयास करने की आवश्यकता है.
नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने पिछले 75 वर्षो में देश की विकास यात्रा में लम्बी दूरी तय करने का जिक्र करते हुए शनिवार को कहा, ‘‘ हमें यह एहसास है कि आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में अभी काफी आगे जाना है.’’ Independence Day 2021: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी कल 8वीं बार फहराएंगे तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दूरदर्शन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘‘असमानता से भरी विश्व व्यवस्था में और अधिक समानता के लिए तथा अन्यायपूर्ण परिस्थितियों में और अधिक न्याय के लिए, दृढ़तापूर्वक प्रयास करने की आवश्यकता है. न्याय की अवधारणा बहुत व्यापक हो गयी है जिसमें आर्थिक और पर्यावरण से जुड़ा न्याय भी शामिल है. आगे की राह बहुत आसान नहीं है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें कई जटिल और कठिन पड़ाव पार करने होंगे, लेकिन हम सबको असाधारण मार्गदर्शन उपलब्ध है.’’
कोविंद ने कहा, ‘‘यह मार्गदर्शन विभिन्न स्रोतों से हमें मिलता है. सदियों पहले के ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक युग के संतों और राष्ट्र-नायकों तक हमारे मार्गदर्शकों की अत्यंत समृद्ध परंपरा की शक्ति हमारे पास है.’’
कोविंद ने ‘गगनयान मिशन’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मिशन के तहत भारतीय वायु सेना के कुछ पायलट विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘जब वे अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे, तो भारत मानव-युक्त अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा.’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ हमारी आकांक्षाओं की उड़ान किसी प्रकार की सीमा में बंधने वाली नहीं है. फिर भी, हमारे पैर यथार्थ की ठोस जमीन पर टिके हुए हैं.’’
कोविंद ने कहा, ‘‘हमें यह एहसास है कि आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में हमें अभी काफी आगे जाना है. वे सपने, हमारे संविधान में, ‘न्याय’, ‘स्वतन्त्रता’, ‘समता’ और ‘बंधुता’ इन चार सारगर्भित शब्दों द्वारा स्पष्ट रूप से समाहित किए गए हैं.’’
उन्होंने इस संदर्भ में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मनाये जा रहे ‘अमृत महोत्सव’ का भी जिक्र किया. राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक औद्योगिक सभ्यता ने मानव जाति के सम्मुख गम्भीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘समुद्रों का जल-स्तर बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है. इस प्रकार, जलवायु परिवर्तन की समस्या हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है.’’
उन्होंने कहा कि देश के लिए गर्व की बात है कि भारत ने, न केवल पेरिस जलवायु समझौते का पालन किया है, बल्कि जलवायु की रक्षा के लिए तय की गई प्रतिबद्धता से भी अधिक योगदान कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी मानवता को विश्व स्तर पर अपने तौर-तरीके से बदलने की सख्त जरूरत है. इसीलिए, भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर दुनिया का रुझान बढ़ता जा रहा है. ऐसी ज्ञान परंपरा जो वेदों और उपनिषदों के रचनाकारों द्वारा निर्मित की गई, रामायण और महाभारत में वर्णित की गई, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध तथा गुरु नानक द्वारा प्रसारित की गई, और महात्मा गांधी जैसे लोगों के जीवन में परिलक्षित हुई.’’
राष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी ने यह सिखाया है कि गलत दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने से अच्छा है कि सही दिशा में धीरे ही सही लेकिन सधे हुए कदमों से आगे बढ़ा जाए. उन्होंने कहा कि अनेक परम्पराओं से समृद्ध भारत के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र की अद्भुत सफलता को विश्व समुदाय सम्मान के साथ देखता है.
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 14, 2021 09:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

