अमेरिका का नया पैंतरा: 'भारत-चीन पर लगाओ 100% टैक्स', ट्रंप ने G7 और EU से की मांग
अमेरिका ने G7 और EU देशों से भारत और चीन पर 100% तक का भारी टैक्स लगाने की मांग की है. इसका मुख्य उद्देश्य इन देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकना है ताकि रूस की युद्ध के लिए फंडिंग बंद हो सके. हालांकि, यूरोपीय संघ व्यापार युद्ध के डर से इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है और जोखिमों को लेकर चिंतित है.
अमेरिका ने रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. अब वह चाहता है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों का समूह G7, भारत और चीन पर भारी-भरकम टैक्स यानी टैरिफ लगाए. अमेरिका का कहना है कि जो भी देश रूस से तेल खरीदे, उस पर 100% तक का टैरिफ लगा देना चाहिए.
अमेरिका ऐसा क्यों चाहता है?
सीधी सी बात है, अमेरिका रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाले पैसे को रोकना चाहता है. अमेरिकी सरकार का मानना है कि भारत और चीन जैसे बड़े देश जब रूस से सस्ता तेल खरीदते हैं, तो उस पैसे का इस्तेमाल रूस युद्ध में करता है.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, "चीन और भारत द्वारा खरीदे गए रूसी तेल से पुतिन की युद्ध मशीन चल रही है और यूक्रेन के लोगों की जान जा रही है. जैसे ही युद्ध खत्म होगा, ये टैक्स हटा दिए जाएंगे."
अमेरिका इसे अपनी "शांति और समृद्धि" योजना का हिस्सा बता रहा है, जिसका मकसद रूस को बातचीत की मेज पर लाने के लिए मजबूर करना है.
G7 और यूरोपीय संघ की बैठक
इस सनसनीखेज प्रस्ताव पर चर्चा के लिए शुक्रवार को G7 देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका) के वित्त मंत्रियों की एक अहम बैठक होने वाली है. इससे पहले अमेरिका ने यूरोपीय संघ (EU) से भी यही अपील की थी, लेकिन वहां से उसे ठंडी प्रतिक्रिया मिली थी.
यूरोपीय संघ क्यों है हिचकिचा रहा है?
यूरोपीय संघ (EU) इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है. उसकी कुछ बड़ी चिंताएं हैं:
- व्यापार युद्ध का डर: भारत और चीन दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतें हैं. उन पर इतना भारी टैक्स लगाने का मतलब है सीधा व्यापारिक पंगा लेना. EU को डर है कि ये देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे यूरोप को आर्थिक नुकसान होगा.
- खुद का प्लान: EU का कहना है कि वह भारत-चीन पर टैक्स लगाने के बजाय, खुद 2027 तक रूस से ऊर्जा खरीदना पूरी तरह बंद कर देगा. साथ ही वह रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है.
कनाडा, जो इस साल G7 की अध्यक्षता कर रहा है, ने बैठक की पुष्टि की है. उसका कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए "आगे के कदमों" पर विचार किया जाएगा.
कुल मिलाकर, अमेरिका रूस को आर्थिक मोर्चे पर घेरने के लिए भारत और चीन को निशाने पर लेना चाहता है, लेकिन उसके अपने सहयोगी ही इस कदम के जोखिमों को लेकर बंटे हुए हैं. अब सबकी नजरें G7 की बैठक पर टिकी हैं कि इस प्रस्ताव का भविष्य क्या होता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 12, 2025 09:27 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

