नई दिल्ली: इंटरनेट (Internet) के दौर में निजी तस्वीरों (Private Photos) और वीडियो (Video) के लीक होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में 'डिजिटल हैशिंग' (Digital Hashing) एक बेहद प्रभावी सुरक्षा तकनीक साबित हो रही है. गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत 'इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (ndian Cybercrime Coordination Centre) ने लोगों को सलाह दी है कि यदि उन्हें निजी फाइलों को लीक करने की धमकी मिल रही है, तो वे अपनी फोटो और वीडियो का 'डिजिटल हैश' जरूर बनाएं. यह तकनीक बिना आपकी निजी फाइल को सार्वजनिक किए, उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड होने से रोकने में सक्षम है. यह भी पढ़ें: MMS Video Leak Threat: एमएमएस लीक और ब्लैकमेलिंग से कैसे बचें? निजी वीडियो/फोटो सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम
डिजिटल हैश क्या है?
डिजिटल हैश एक अद्वितीय (unique) वर्णों की श्रृंखला (string) है, जिसे एक गणितीय एल्गोरिदम (जैसे SHA-256) के जरिए तैयार किया जाता है. जिस तरह हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, उसी तरह हर डिजिटल फाइल का अपना एक विशिष्ट हैश होता है.
- एक तरफा प्रक्रिया: एन्क्रिप्शन के विपरीत, जिसे 'की' (key) के जरिए वापस बदला जा सकता है, हैशिंग एक 'वन-वे' फंक्शन है. इसका मतलब है कि एक बार फोटो का हैश बन जाने पर, उस हैश से वापस ओरिजिनल फोटो नहीं बनाई जा सकती.
- प्राइवेसी सुरक्षा: सोशल मीडिया कंपनियां केवल 'ब्लॉक किए गए हैश' की सूची रखती हैं. उन्हें आपकी निजी फोटो को 'देखने' या स्टोर करने की आवश्यकता नहीं होती, वे केवल उस कोड के जरिए फाइल को पहचान कर उसे अपलोड होने से रोक देती हैं.
डिजिटल हैश कैसे तैयार करें?
'StopNCII.org' जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म्स ने इस प्रक्रिया को बहुत सरल बना दिया है, जिसे मेटा, टिकटॉक और गूगल जैसी प्रमुख टेक कंपनियां भी सपोर्ट करती हैं.
- स्थानीय जनरेशन: जब आप किसी फोटो या वीडियो का हैश बनाते हैं, तो यह प्रक्रिया आपके फोन या कंप्यूटर पर ही (locally) होती है। आपकी फाइल कभी भी आपके डिवाइस से बाहर नहीं जाती.
- सबमिशन और मैचिंग: सिस्टम केवल वह हैश (अक्षरों और अंकों की स्ट्रिंग) डेटाबेस में भेजता है. जब भी कोई आपकी वही फोटो अपलोड करने की कोशिश करता है, तो प्लेटफॉर्म उसे पहचान लेता है और फाइल के वायरल होने से पहले ही उसे ब्लॉक कर देता है.
गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश: धमकी मिलने पर क्या करें?
गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा हैंडल '@CyberDost' ने 'सेक्सटॉर्शन' (sextortion) या निजी मीडिया लीक की धमकी का सामना करने वाले पीड़ितों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:
- सबूत न मिटाएं: धमकी भरे संदेशों, अपराधी की प्रोफाइल और बातचीत का स्क्रीनशॉट जरूर सेव करें.
- डिजिटल हैश बनाएं: तुरंत अपनी निजी फाइलों का डिजिटल हैश तैयार करें.
- पोर्टल पर रिपोर्ट करें: बिना देरी किए cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं.
- टेकडाउन नियम: भारत के आईटी नियमों के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर गैर-सहमति वाली अंतरंग सामग्री को हटाना अनिवार्य है.
- फिरौती न दें: किसी भी स्थिति में ब्लैकमेलर की मांग पूरी न करें, क्योंकि इससे और अधिक पैसे ऐंठने का खतरा बढ़ जाता है.
क्या है डिजिटल हैशिंग?
Agar koi aapki private photos ya videos online share karne ki dhamki de raha hai, toh yeh steps lein:
•Apni image/video ka digital hash create karein
•Yeh hash, social media platforms ke saath share hota hai
•Matching content detect hote hi platforms use block kar sakte hain pic.twitter.com/cByCwjhDhn
— CyberDost I4C (@Cyberdost) March 2, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक, हैश-आधारित सुरक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि 'इंटरनेट वॉच फाउंडेशन' जैसे संगठनों द्वारा अवैध सामग्री को वैश्विक स्तर पर हटाने के लिए भी किया जा रहा है. एक प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक की गई फाइल का हैश अब अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी उसे पहचानने में मदद करता है, जिससे कंटेंट के वायरल होने की संभावना काफी कम हो गई है.













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