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Holi Bhai Dooj 2026: होली भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और तिलक लगाने का सही समय

होली के उत्सव के समापन के साथ ही 'होली भाई दूज' का पर्व नजदीक है. इस वर्ष यह त्यौहार 5 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. इस लेख में पर्व का शुभ मुहूर्त, पौराणिक महत्व और तिलक की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.

Holi Bhai Dooj 2026: होली भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और तिलक लगाने का सही समय
होली भाई दूज 2026 (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: होली के रंगों के उल्लास के बाद, सनातन परंपरा में भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक 'होली भाई दूज' मनाया जाता है. रंगों वाली होली के अगले दिन मनाए जाने वाले इस पर्व को 'भ्रातृ द्वितीया' और 'यम द्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाईयों के माथे पर शुभ मुहूर्त में तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र के साथ-साथ उनके खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. यह पर्व भाई-बहन के आपसी स्नेह और विश्वास को और मजबूत करने का अवसर होता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि होली भाई दूज की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और तिलक लगाने का सही समय… यह भी पढ़ें: Holi 2026 Sanskrit Wishes: रंगोत्सवस्य शुभाशया:! प्रियजनों को संस्कृत के इन शानदार Shlokas, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें बधाई

भाई दूज 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का आरंभ 4 मार्च 2026 की शाम 4:48 बजे से होगा और इसका समापन 5 मार्च 2026 को शाम 5:03 बजे होगा. हिंदू धर्म में 'उदयातिथि' (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए वर्ष 2026 में होली भाई दूज का पर्व 5 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा.

  • द्वितीया तिथि प्रारंभ: 4 मार्च 2026, शाम 04:48 बजे
  • द्वितीया तिथि समापन: 5 मार्च 2026, शाम 05:03 बजे

पौराणिक महत्व और कथा

भाई दूज की महिमा पौराणिक कथाओं में गहराई से दर्ज है. सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, सूर्यपुत्र यमराज अपनी बहन यमुना से अत्यंत स्नेह करते थे. व्यस्त जीवनशैली के कारण वे लंबे समय तक उनसे मिल नहीं सके थे. कहा जाता है कि होली के अगले दिन यानी द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे, जहां यमुना ने उनका विधिपूर्वक स्वागत किया, तिलक लगाया और उन्हें विविध पकवान खिलाए.

बहन के आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक ग्रहण करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा. इसी मान्यता के साथ यह पर्व भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है. इस वजह से साल में दो बार भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. एक होली भाई दूज और दूसरा दिवाली भाई दूज.

पूजा विधि और परंपराएं

भाई दूज पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए विशेष प्रार्थनाएं करती हैं. इस दिन मुख्य अनुष्ठान निम्नलिखित हैं:

  1. तिलक और आरती: सुबह स्नान के बाद बहनें पूजा की थाली तैयार करती हैं, जिसमें रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है. भाई को आसन पर बैठाकर मस्तक पर तिलक लगाया जाता है और आरती उतारी जाती है.
  2. मंगलकामना: तिलक लगाने के बाद बहनें भाई के कल्याण और उनके जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं.
  3. उपहारों का आदान-प्रदान: परंपरा के अनुसार, इस दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी सुरक्षा व साथ का संकल्प दोहराते हैं.
  4. पारंपरिक व्यंजन: इस पर्व पर घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें गुजिया, मालपुआ और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं.

भाई दूज का यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों में मधुरता और समर्पण का प्रतीक है. यह पर्व भाई-बहन के उस अटूट बंधन को दर्शाता है जो सुरक्षा और स्नेह के धागे से बंधा होता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 04, 2026 02:59 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).