नई दिल्ली: राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म 'रैपिडो' (Rapido) के एक राइडर द्वारा महिला यात्री को सफर खत्म होने के बाद निजी मैसेज भेजने का मामला सामने आया है. इंस्टाग्राम यूजर अनुष्का (Anushka) ने सोशल मीडिया (Social Media) पर इस घटना का खुलासा करते हुए बताया कि राइडर ने ड्रॉप करने के कुछ ही देर बाद उनसे वॉट्सऐप पर संपर्क किया और मिलने का दबाव बनाया. इस खुलासे के बाद इंटरनेट पर डिजिटल सुरक्षा (Digital Security) और यूजर्स की निजता (Privacy) को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. यह भी पढ़ें: Ola-Uber-Rapido Strike: देशभर में आज ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल, जानें उनकी प्रमुख मांगें
'अजीब बातचीत' और स्क्रीनशॉट वायरल
अनुष्का ने अपने वायरल पोस्ट में उस चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है, जिसे उन्होंने "अजीब" और "असहज" करने वाला बताया. इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि एक राइडर के पास ग्राहक का व्यक्तिगत मोबाइल नंबर उस सीमा से परे कैसे पहुंचा, जो केवल राइड के दौरान आवश्यक होता है. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताते हुए मांग की है कि सर्विस प्रोवाइडर्स को ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा के लिए अधिक जवाबदेह होना चाहिए.
Rapido राइडर के WhatsApp मैसेज से प्राइवेसी को लेकर चिंताएं बढ़ीं
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रैपिडो की प्रतिक्रिया: माफी और जांच का आश्वासन
मामले के तूल पकड़ने पर रैपिडो ने आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करते हुए इस व्यवहार को "अस्वीकार्य" बताया है. कंपनी ने कहा, "हम कैप्टन (राइडर) के इस अनुचित व्यवहार के लिए माफी मांगते हैं। हम ऐसी शिकायतों को पूरी गंभीरता से लेते हैं." कंपनी ने अनुष्का से उनका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और राइड आईडी साझा करने का अनुरोध किया है ताकि त्वरित जांच की जा सके। रैपिडो ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर राइडर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह भी पढ़ें: Bengaluru: बेंगलुरु में रैपिडो ड्राइवर ने की बदसलूकी, महिला पैसेंजर को जड़ा थप्पड़; VIDEO वायरल
डेटा सुरक्षा और सुरक्षा उपायों की मांग
इस घटना ने राइड-हेलिंग सेवाओं में सुरक्षा मानकों की कमियों को उजागर किया है. कई विशेषज्ञों और ग्राहकों का मानना है कि राइड पूरी होने के बाद व्यक्तिगत संपर्क जानकारी का किसी भी रूप में उपयोग नहीं होना चाहिए.
- कॉल मास्किंग: सुरक्षा के लिए कई कंपनियां 'कॉल मास्किंग' फीचर का उपयोग करती हैं ताकि राइडर और ग्राहक एक-दूसरे का असली नंबर न देख सकें.
- डेटा प्रोटेक्शन: यूजर्स ने मांग की है कि कंपनियों को डेटा सुरक्षा कानूनों का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों के नंबरों का दुरुपयोग रोका जा सके.













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