Kachra Delivery Viral Video: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए एक अजीबोगरीब वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. वायरल वीडियो में एक महिला पर आरोप है कि उसने घरेलू कचरा फेंकने के लिए Rapido Porter (गुड्स डिलीवरी सर्विस) बुक की. यह वीडियो खुद Rapido Porter राइडर ने रिकॉर्ड किया था, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है. ‘1 Minute 42 Second’ Viral Video: चलती ट्रेन के टॉयलेट में 90 मिनट तक बंद रहा कपल; वीडियो वायरल होने पर छिड़ी प्राइवेसी की बहस
डिलीवरी के नाम पर निकला कचरा
वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला एक सीलबंद कार्डबोर्ड बॉक्स राइडर को सौंपती है. पिकअप के दौरान राइडर जब पूछता है, “पेमेंट हो गया है?”, तो महिला जवाब देती है कि ऑनलाइन भुगतान कर दिया गया है. इसके बाद राइडर अपने दर्शकों से कहता है कि लोकेशन ज्यादा दूर नहीं है, करीब 700 मीटर.
लेकिन जब राइडर ड्रॉप लोकेशन पर पहुंचता है, तो वहां कोई मौजूद नहीं होता. वहां सिर्फ कचरे का ढेर दिखाई देता है. हैरान राइडर महिला को फोन करता है और पूछता है कि पार्सल किसे देना है. इस पर महिला कहती है, “भैया, किसी को देना नहीं है. वहीं फेंक दीजिए, ये कचरा है.”
आज का वायरल वीडियो
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राइडर जब बॉक्स खोलता है तो उसमें वाकई कचरा निकलता है. हैरानी और हंसी के बीच वह कहता है कि अब Porter सर्विस का इस्तेमाल कचरा फेंकने के लिए भी होने लगा है. आखिर में वह कचरा वहीं डाल देता है और वीडियो खत्म करते हुए कहता है— “ये है हमारा विकसित भारत!”
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने इसे “जुगाड़” बताते हुए मजाकिया अंदाज में लिया, तो कई लोगों ने महिला की कड़ी आलोचना की.
एक यूजर ने लिखा, “ऊपर से मजेदार लगता है, लेकिन अंदर से असहज करने वाला है. किसी गिग वर्कर को सिर्फ कचरा ढोने का जरिया बनाना गलत है.”
वहीं दूसरे ने कहा, “ये तो शुद्ध देसी जुगाड़ है! लेकिन बेचारा डिलीवरी बॉय सिर्फ ₹30-50 में कचरा ढो रहा है.”
नागरिक जिम्मेदारी पर सवाल
इस वायरल वीडियो ने गिग वर्कर्स की गरिमा, नागरिक जिम्मेदारी और सुविधा के नाम पर हो रहे गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई लोगों का मानना है कि कचरा निपटान हर नागरिक की जिम्मेदारी है, जिसे बिना सहमति किसी डिलीवरी वर्कर पर नहीं थोपा जाना चाहिए. लखनऊ का यह वायरल मामला भले ही सोशल मीडिया पर हंसी का विषय बन गया हो, लेकिन इसने सुविधा बनाम संवेदनशीलता की बहस को फिर से हवा दे दी है.













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