लेबनान में बढ़ते इजरायली हमलों पर भड़कीं मिया खलीफा; भावुक होकर कहा- 'यह आतंकवाद से कम नहीं' (Watch Video)
मिया खलीफा (Photo Credits: Instagram)

लंदन/बेरूत: लेबनानी मूल की पूर्व वयस्क फिल्म अभिनेत्री (Former Adult Film Actress of Lebanese Descent) और वर्तमान मीडिया पर्सनैलिटी (Current Media Personality) मिया खलीफा (Mia Khalifa) ने अपनी मातृभूमि लेबनान (Lebanon) में जारी हिंसा पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है. हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो संदेश (Viral Video Messages) में खलीफा ने लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों (Israeli Military Operations) की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने वर्तमान स्थिति को 'डिस्तोपियन' (Dystopian) (भयानक और दमनकारी) बताते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं के परे बताया. यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति; इजरायली पीएम नेतन्याहू बोले- 'हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी जंग'

'10 मिनट में 160 हवाई हमले'

मिया खलीफा ने अपने वीडियो में हमलों की भयावहता का जिक्र करते हुए कहा कि केवल दस मिनट के भीतर लगभग 160 हवाई हमले किए गए. उन्होंने दावा किया कि ये हमले न केवल रणनीतिक ठिकानों पर हुए, बल्कि इनमें नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे घरों, स्कूलों और अस्पतालों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. खलीफा ने भावुक होते हुए कहा कि स्थिति इतनी खराब है कि कब्रिस्तानों और अंतिम संस्कार समारोहों को भी नहीं बख्शा गया.

पोर्न स्टार मिया खलीफा ने लेबनान पर इजराइली हमलों की कड़ी निंदा की

 

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकताओं पर सवाल

खलीफा ने वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकताओं को चुनौती दी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ दुनिया अंतरिक्ष विज्ञान में प्रगति कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वह मासूम लोगों पर हो रहे युद्ध को रोकने में पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि डायस्पोरा (प्रवासी समुदाय) के रूप में अपनी जड़ों को इस तरह तबाह होते देखना बेहद व्यक्तिगत और पीड़ादायक है.

'कब रुकेगा यह सब?'

वीडियो के अंत में मिया खलीफा काफी भावुक नजर आईं. उन्होंने दुनिया से एक चुभता हुआ सवाल पूछा— 'यह सब कब रुकेगा?' उन्होंने अपनी पहुंच और प्लेटफॉर्म का उपयोग लेबनान के लोगों की आवाज को बुलंद करने और दुनिया का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर खींचने के लिए किया. उनके शब्दों ने राजनीतिक सुर्खियों और बयानों से परे युद्ध के वास्तविक मानवीय बोझ को रेखांकित किया है.