तेल अवीव/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है. अमेरिका और ईरान अगले दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमत हो गए हैं. इस समझौते के तहत ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए तैयार है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने मंगलवार देर रात अपनी उस समय सीमा (Deadline) को वापस ले लिया, जिसमें उन्होंने ईरान (Israel) के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की चेतावनी दी थी. यह भी पढ़ें: Iran-US Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने की 14 दिनों के सीजफायर की घोषणा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को तैयार
इजरायल का रुख: हिजबुल्लाह पर हमला जारी रहेगा
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israel Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने बुधवार को एक बयान जारी कर अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस युद्धविराम का समर्थन किया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह समझौता लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की लड़ाई को कवर नहीं करता है. नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इजरायल इस बात पर अडिग है कि ईरान अब परमाणु या मिसाइल खतरा न बना रहे और उसकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
समझौते की शर्तें और बातचीत का अगला दौर
इस युद्धविराम को लागू करने में पाकिस्तान और ओमान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' ने युद्धविराम स्वीकार कर लिया है और घोषणा की है कि शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत शुरू होगी.
समझौते के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान इस जलमार्ग को सैन्य प्रबंधन के तहत खोलने पर राजी हुआ है। ओमान और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से 'शिपिंग शुल्क' वसूल सकेंगे, जिसका उपयोग ईरान अपने पुनर्निर्माण के लिए करेगा।
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सभी आक्रामक अभियान रोक दिए हैं, हालांकि उसकी रक्षात्मक कार्रवाइयां जारी रहेंगी।
अनिश्चितता और आंतरिक विरोध
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. बुधवार सुबह इजरायल, ईरान और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में हमले जारी रहने की खबरें मिलीं. अबू धाबी में एक गैस प्रोसेसिंग सुविधा में आग लगने की सूचना मिली है.
ईरान के भीतर भी इस समझौते का विरोध देखा जा रहा है. तेहरान की सड़कों पर कट्टरपंथियों ने 'अमेरिका और इजरायल की मौत' के नारे लगाए और झंडे जलाए. साथ ही, समझौते के '10-सूत्रीय प्लान' के भाषा अनुवाद (फारसी बनाम अंग्रेजी) को लेकर भी कुछ तकनीकी मतभेद सामने आए हैं, विशेषकर परमाणु संवर्धन (Enrichment) के मुद्दे पर. यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी: 'आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, मैं ऐसा नहीं चाहता लेकिन शायद यह होकर रहेगा'
चीन और पाकिस्तान की भूमिका
ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन ने भी तेहरान को युद्धविराम के लिए प्रोत्साहित किया है. वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दो सप्ताह की मोहलत का फैसला लिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह 14 दिनों का समय दोनों देशों को एक दीर्घकालिक शांति समझौते तक पहुँचने का अवसर प्रदान करेगा.













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