FACT CHECK: क्या पीएम मोदी ने खुद को 'चोर और लुटेरा' कहा? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा VIDEO निकला भ्रामक, जानें पूरी सच्चाई
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक 10 सेकंड का वीडियो खूब शेयर हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहते हुए नजर आते हैं, "अगर बचपन में मेरी मां ने छोटी चोरी करने से रोका होता, तो आज इतना बड़ा लुटेरा न बनता."
PM Modi Viral Video Fact Check: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक 10 सेकंड का वीडियो खूब शेयर हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहते हुए नजर आते हैं, "अगर बचपन में मेरी मां ने छोटी चोरी करने से रोका होता, तो आज इतना बड़ा लुटेरा न बनता." इस क्लिप को यह दावा करते हुए फैलाया जा रहा है कि पीएम मोदी ने खुद को चोर और लुटेरा बताया है. लेकिन फैक्ट चेक में सामने आया कि यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है. यह वीडियो असल में साल 2021 का है, जब पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे. उस समय वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे.
पीएम मोदी का एडिटेड वीडियो वायरल
मोदी :- जब मै छोटी चोरी करता था, उस दिनों अगर मेरी माँ ने रोका होता तक मैं इतना बड़ा लुटेरा न बनता... 😢😢#VoteChori pic.twitter.com/Vwsgu1F67C
— vedika Jain INC #जुडेगा भारत जीतेगा INDIA ❤️ (@vedikakalantre1) August 9, 2025
यहां है असली वीडियो और सच्चाई
क्या है वीडियो की असली सच्चाई?
अपने भाषण में उन्होंने एक काल्पनिक कहानी सुनाई थी, जिसमें एक डकैत अपनी मां को दोष देता है कि अगर उसने बचपन में उसे छोटी चोरी से रोका होता, तो वह बड़े अपराधों तक नहीं पहुंचता. वायरल हो रही क्लिप में केवल कहानी का एक हिस्सा काटकर दिखाया गया है, जिससे यह भ्रम पैदा हो रहा है कि मोदी अपने बारे में बात कर रहे थे.
जबकि असल में यह कहानी एक उदाहरण के तौर पर दी गई थी, ताकि यह समझाया जा सके कि छोटे स्तर पर भ्रष्टाचार को अगर समय रहते रोका न जाए, तो वह बड़े अपराध में बदल सकता है.
काट-छांट कर बनाया गया वीडियो
जांच के दौरान, InVID टूल से वीडियो को फ्रेम दर फ्रेम तोड़ा गया और गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया गया. इससे नरेंद्र मोदी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 10 अप्रैल 2021 का पूरा भाषण मिला. 39:02 मिनट से यह स्पष्ट होता है कि वे सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साध रहे थे और यह कहानी उसी संदर्भ में थी.
इससे यह साबित होता है कि वीडियो गलत तरीके से काट-छांट कर बनाया गया है. इसका मकसद गलत संदेश फैलाना और जनता को गुमराह करना है.
पहले भी वायरल हुई है ये वीडियो
हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. 2021 में भी इसी वीडियो को खूब वायरल किया गया था, जिसका मकसद सिर्क सोशल मीडिया पर गलतफहमी फैलाना था. उस दौरान timesofindia की एक रिपोर्ट में इसे "आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट" और "मिसलीडिंग" करार दिया गया था.
यह घटना फिर साबित करती है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वायरल कंटेंट को बिना सच्चाई जांचे शेयर करना गलतफहमियां फैलाता है. चुनावी माहौल में इस तरह की एडिटेड क्लिप्स माहौल को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहना जरूरी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2025 09:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

