Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की स्थिति एक बार फिर चिंताजनक हो गई है. बुधवार को कालिंदी कुंज और ओखला बैराज के पास यमुना नदी की सतह पर जहरीले झाग की मोटी परतें तैरती देखी गईं. यह सफेद और गुलाबी रंग का झाग किसी ग्लेशियर की तरह पूरी नदी पर फैला हुआ है, जो दिल्ली में बढ़ते जल प्रदूषण के खतरनाक स्तर को दर्शाता है. नदी में मौजूद इस जहरीले कचरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों में भारी रोष है.
फॉस्फेट और औद्योगिक कचरा है मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, यमुना में इस तरह के झाग बनने की मुख्य वजह पानी में फॉस्फेट (Phosphate) की अधिक मात्रा होना है. यह फॉस्फेट मुख्य रूप से अनुपचारित डिटर्जेंट और घरेलू सीवेज के माध्यम से नदी में गिरता है. जब ओखला बैराज से पानी गिरता है और उसमें हलचल (Churning) होती है, तो यह रसायन झाग का रूप ले लेते हैं. इस बार झाग में गुलाबी रंग का दिखना और भी खतरनाक माना जा रहा है, जो अवैध टेक्सटाइल यूनिट्स से निकलने वाले डाई और रसायनों की मौजूदगी का संकेत है. यह भी पढ़े: Delhi Air Pollution Update: दिल्ली में वायु प्रदूषण के चलते लोगों का सांस लेना हुआ मुहाल, आनंद विहार में AQI 409 श्रेणी में पहुंचा
दिल्ली में यमुना का बुरा हाल
VIDEO | Toxic foam floats over Yamuna River in Delhi. Visuals from Kalindi Kunj.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/QabQ8j7k3H
— Press Trust of India (@PTI_News) March 18, 2026
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
यमुना का "अत्यधिक खराब" (Very Poor) जल स्तर न केवल जलीय जीवन के लिए घातक है, बल्कि यह आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, इस जहरीले झाग के संपर्क में आने से त्वचा में जलन, एलर्जी और सांस से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं. हवा में उड़ते झाग के कण फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
सरकार के प्रयास और वर्तमान स्थिति
दिल्ली सरकार द्वारा नदी में एंटी-फोमिंग एजेंट (Defoaming agents) का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. पर्यावरणविदों का कहना है कि जब तक औद्योगिक कचरे और अनुपचारित सीवेज को सीधे नदी में गिरने से नहीं रोका जाएगा, तब तक यमुना की स्थिति में स्थायी सुधार संभव नहीं है. फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने लोगों को नदी के तट से दूर रहने की सलाह दी है.













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