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Stock Market Crash 11 May: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद सेंसेक्स 943 अंक टूटा

वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के विफल होने के कारण भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है.

Stock Market Crash 11 May: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद सेंसेक्स 943 अंक टूटा

Why Market Is Down Today: भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है. इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 943 अंक गिरकर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी फिसलकर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है. बाजार के जानकारों के अनुसार, निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की है.

शांति वार्ता की विफलता का वैश्विक असर

बाजार में गिरावट का प्राथमिक कारण अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का विफल होना माना जा रहा है. मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों के साथ बाजार पिछले कुछ दिनों से स्थिर था. हालांकि, वार्ता टूटने की खबर ने कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा की आशंका को बढ़ा दिया है. इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी देखी गई, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी बाजार पर पड़ा.

निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे

आज के कारोबारी सत्र में निफ्टी की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई थी. कारोबार के दौरान इसने 24,000 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को तोड़ दिया. बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी के प्रमुख घटकों में गिरावट के कारण बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से नकारात्मक रहा. निवेशकों के बीच डर के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी भारी दबाव देखने को मिला.

इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार

बाजार में मंदी के इस माहौल में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली का दौर रहा. ऊर्जा और तेल कंपनियों के शेयरों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की आशंका के चलते अस्थिरता देखी गई. हालांकि, आईटी सेक्टर में भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे टेक शेयरों पर दबाव और बढ़ गया है.

विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है. अमेरिका-ईरान संघर्ष न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती है. यदि तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देशों के लिए मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ जाएगा. फिलहाल, निवेशकों को सावधानी बरतने और गिरावट वाले बाजार में जल्दबाजी में बड़े दांव न लगाने की सलाह दी जा रही है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2026 10:20 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).