नई दिल्ली, 1 मई: ईरान संकट (Iran Crisis) और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव का असर अब भारतीय रसोई (Indian Kitchen) और व्यापार पर दिखने लगा है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में आई तेजी के बाद, शुक्रवार से दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (Commercial LPG) सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है. इस संशोधन के बाद अब दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर ₹3,071.5 हो गई है. यह भी पढ़ें: Commercial LPG Price Hike: चुनाव खत्म होते ही महंगाई का बड़ा झटका, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर करीब ₹1000 तक महंगा, नई दरें आज से ही लागू; जानें दिल्ली, मुंबई समेत अन्य शहरों के रेट
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत
कमर्शियल गैस की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के बीच, घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. देश के करीब 33 करोड़ घरेलू यूजर्स को फिलहाल इस मूल्य वृद्धि से बाहर रखा गया है.
ईरान संकट और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव
वैश्विक तेल बाजार में उछाल का मुख्य कारण ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना और अमेरिका द्वारा ईरानी तेल निर्यात पर लगाए गए कड़े प्रतिबंध हैं. हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग है, और यहां गतिरोध से आपूर्ति में बड़ी कमी आने की आशंका है
ब्रेंट क्रूड का भाव 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ $111.21 प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) $105.37 पर कारोबार कर रहा है. हाल ही में ब्रेंट क्रूड ने 4 साल में पहली बार $120 प्रति बैरल का स्तर पार किया था, जिसने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) की चिंता बढ़ा दी है. यह भी पढ़ें: Commercial LPG Price Hike: बजट पेश होने से पहले महंगाई की मार, कमर्शियल गैस सिलेंडर 49 रुपये महंगा, जानें दिल्ली समेत अन्य शहरों के नए रेट
लगातार तीसरी बार बढ़ी कीमतें
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से यह तीसरी बार है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं. फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने भी चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ा रही हैं, जिससे आर्थिक नीतियां जटिल हो रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस ऊर्जा संकट से एशिया के देशों को अधिक आर्थिक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है.
भविष्य की चुनौतियां
वर्तमान में स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है. हालांकि 8 अप्रैल से संघर्ष विराम प्रभावी है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिका के साथ बातचीत से जल्दी परिणाम की उम्मीद करना 'अवास्तविक' है. अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों और शिपिंग कंपनियों के साथ मिलकर हॉर्मुज़ के माध्यम से सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के लिए एक गठबंधन बनाने पर काम कर रहा है.












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