Eid E Milad Un Nabi 2025: ईद मिलाद-उन-नबी (Eid E Milad Un Nabi) दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जिसे मावलिद (Mawlid) भी कहते हैं. इस पर्व को इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है. इस पर्व को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (Prophet Muhammad) के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है. साल 2025 में ईद मिलाद-उन-नबी, 12 रबी-अल-अव्वल, 1447 हिजरी को मनाया जा रहा है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, भारत में ईद मिलाद-उन-नबी का पर्व 5 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा तो वहीं सऊदी अरब में आज यानी 4 सितंबर 2025 को यह त्योहार मनाया जा रहा है. माना जाता है कि पैगंबर साहब का जन्म 570 ईस्वी में मक्का में 12 रबी-अल-अव्वल को हुआ था. आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह पर्व क्यों इतना खास है? यह भी पढ़ें: Prophet Muhammad Quotes 2025: मिलाद-उन-नबी पर पैगंबर मुहम्मद के शिक्षाप्रद कोट्स अपने इष्ट-मित्रों को शेयर कर पर्व को सेलिब्रेट करें!
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का महत्व
इस्लाम धर्म के अनुसार, इसी दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था. उनका पूरा नाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. उन्हें इस्लाम धर्म का आखिरी पैगंबर माना जाता है. पैगंबर मोहम्मद साहब के पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी आमिना था. कहा जाता है कि अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरआन अता की थी, जिसके बाद उन्होंने पवित्र कुरआन का संदेश दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम किया.
मावलिद खुशी या गम का पर्व?
अरबी मैं मावलिद शब्द का अर्थ होता है जन्म, लेकिन कुछ लोग इस दिन को पैगंबर साहब की वफात (मृत्यु) की तारीख भी मानते हैं, इसलिए वे इसे शोक के रूप में याद करते हैं. माना जाता है कि रबी-उल-अव्वल माह की 12वीं तारीख को ही पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था. वहीं ऐसी मान्यता भी है कि इसी दिन उनका वफ़ात (इंतकाल) भी हुआ था, इसलिए कई लोग इसे पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के उत्सव के तौर पर मनाते हैं तो कई लोग इसे शोक के रूप में भी मनाते हैं.
कैसे मनाया जाता है यह त्योहार?
इस दिन अल्लाह की इबादत की जाती है. इस अवसर पर घरों, मस्जिदों और गलियों को खास तरीके से सजाया जाता है. इस दिन जुलूस निकाले जाते हैं और लोग एक-दूसरे से गले मिलकर इस पर्व की मुबारकबाद देते हैं. इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की जाती है. ऐसी मान्यता है कि ईद मिलाद-उन-नबी के दिन दान और जकात करने से अल्लाह मेहरबान होते हैं
पैगंबर मोहम्मद का जन्म और संदेश
इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद के जन्म से पहले लोग अज्ञानता और अंधकार में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. जब अज्ञानता और अंधकार के चलते लोग अल्लाह के मार्ग से भटक रहे थे, तब अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब को अपना संदेशवाहक बनाकर धरती पर भेजा. कहा जाता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब अपने साथ एकता और सत्य का संदेश लेकर आए थे. उन्होंने लोगों को सही मार्ग दिखाते हुए उन्हें अज्ञानता और अंधकार से बाहर लाकर सही मार्ग दिखाया, साथ ही उन्होंने लोगों को अच्छाई और बुराई में अंतर समझने की शक्ति प्रदान की.













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