Angarki Sankashti Chaturthi 2026: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी  साल का पहला बड़ा गणेश उत्सव आज; मुंबई–दिल्ली सहित कई शहरों में चांद निकलने का जानें समय

Angarki Sankashti Chaturthi 2026:  देशभर में आज करोड़ों श्रद्धालु साल 2026 की पहली बड़ी संकष्टी चतुर्थी मना रहे हैं। आज 6 जनवरी को 'सकट चौथ' (Sakat Chauth) या 'माघी चतुर्थी' का उपवास रखा जा रहा है। इस बार चतुर्थी मंगलवार को पड़ने के कारण इसे 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' (Angarki Sankashti Chaturthi) कहा जा रहा है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है. चतुर्थी तिथि आज सुबह 08:01 बजे शुरू हो चुकी है, जो बुधवार सुबह 06:52 बजे तक रहेगी.

अंगारकी योग और सकट चौथ का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन आती है, तो उसे 'अंगारकी' कहा जाता है। वैदिक परंपरा में मंगलवार का दिन मंगल (Mars) ग्रह का होता है, जो भगवान गणेश से संबंधित माने जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज के दिन व्रत रखने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और 'मंगल दोष' से राहत मिलती है। उत्तर भारत में इसे 'संकट चौथ' के रूप में मनाया जाता है, जो जीवन की बाधाओं को दूर करने का प्रतीक है. यह भी पढ़े:  Angarki Sankashti Chaturthi 2023 Messages: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर ये भक्तिमय WhatsApp Stickers, Quotes, Greetings, GIF Images के जरिए दें शुभकामनाएं

प्रमुख शहरों में चंद्रोदय (Moonrise) का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही संपन्न होता है। उत्तर भारत में कोहरे के कारण दृश्यता कम हो सकती है, इसलिए खगोलीय गणना के आधार पर समय का पालन किया जा सकता है। विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का अनुमानित समय इस प्रकार है:

  • नई दिल्ली: रात 8:54 बजे

  • मुंबई: रात 9:23 बजे

  • पुणे: रात 9:20 बजे

  • लखनऊ: रात 8:41 बजे

  • बेंगलुरु: रात 9:10 बजे

  • कोलकाता: रात 8:15 बजे

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय मंदिरों से सटीक समय की पुष्टि कर लें।

परंपराएं और धार्मिक अनुष्ठान

दिन की शुरुआत सुबह के स्नान और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना के साथ हुई। इस अवसर पर भगवान को दुर्वा घास, फूल और उनके प्रिय मोदक व लड्डू अर्पित किए जाते हैं। माघ मास के कारण तिल और गुड़ का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र में इसे 'लंबोदर संकष्टी चतुर्थी' के रूप में मनाया जाता है, जहां मुंबई के सिद्धिविनायक और पुणे के दगड़ूशेठ हलवाई जैसे मंदिरों में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ

यूं तो संकष्टी चतुर्थी हर महीने आती है, लेकिन माघ महीने की चतुर्थी (सकट चौथ) सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से यह त्योहार मां और संतान के बीच के अटूट बंधन को दर्शाता है। कई माता-पिता अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए आज के दिन निर्जला व्रत रखते हैं। साल 2026 में ऐसे 'अंगारकी' संयोग बहुत सीमित हैं, जिसके कारण आज के दिन का महत्व और बढ़ गया है।