Rajasthan News: राजस्थान में पशुपालकों को बड़ी राहत, जानवरों को गंभीर संक्रामक रोगों से बचाने के लिए लगाया जाएगा टीका
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Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने प्रदेश के पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए पशुओं में होने वाले गंभीर संक्रामक रोगों के खिलाफ एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है. 'खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम' के सातवें चरण के तहत राज्य के करीब 2.32 करोड़ से अधिक दुधारू पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और डेयरी उद्योग को आर्थिक नुकसान से बचाना है.

क्या है खुरपका-मुंहपका (FMD) रोग?

खुरपका-मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease) पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है. यह विशेष रूप से गायों, भैंसों, भेड़ों और बकरियों जैसे खुर वाले जानवरों को प्रभावित करता है. इस बीमारी के कारण पशुओं को तेज बुखार, मुंह में छाले और अत्यधिक लार गिरने जैसी समस्याएं होती हैं. इससे न केवल पशु कमजोर हो जाते हैं, बल्कि दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट आती है.  यह भी पढ़े:  Rajasthan Tension: मस्जिद के बाहर लोहे की रेलिंग लगाने को लेकर विवाद, पथराव में 6 पुलिसकर्मी घायल, चोमू में 24 घंटे के लिए WhatsApp, Social Media सर्विस बंद

अभियान का मुख्य लक्ष्य और रणनीति

पशुपालन विभाग के अनुसार, इस टीकाकरण अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है. सरकार ने 2030 तक राजस्थान को पूरी तरह से एफएमडी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है. टीकाकरण के दौरान प्रत्येक पशु की पहचान के लिए 'ईयर टैगिंग' (Ear Tagging) की जा रही है. इसके साथ ही पशुओं का पूरा डेटा 'इनैप' (INAPH) पोर्टल पर डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है ताकि टीकाकरण की स्थिति की निगरानी की जा सके.

घर-घर जाकर होगा टीकाकरण

पशुपालकों की सुविधा के लिए पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर टीकाकरण कर रही हैं. विभाग ने पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन का स्टॉक सुनिश्चित किया है और कोल्ड चेन के माध्यम से टीकों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि कोई भी पात्र पशु इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रहे.

पशुपालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि पशुपालन को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जाए. खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से होने वाली पशु मृत्यु और उत्पादन में कमी सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि साल में दो बार (मार्च और सितंबर) नियमित टीकाकरण से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.