झांसी, 13 मई: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी (Jhansi) में एक कथित वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहे इस वीडियो (Viral Video) में कथित तौर पर बीजेपी नेता आदर्श शर्मा लाला (BJP leader Adarsh Sharma Lala) को एक आपत्तिजनक डांस सीक्वेंस (Objectionable Dance Sequence) में दिखाया गया है. इस क्लिप के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं भाजपा नेता ने इसे पूरी तरह से निराधार बताते हुए डिजिटल हेरफेर का मामला बताया है. यह भी पढ़ें: ‘जेब में प्याज रखिए, गर्मी गायब’: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का 'देसी जुगाड़' सोशल मीडिया पर वायरल
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
यह बिना तारीख वाला वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर), व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. वीडियो में दिख रहा व्यक्ति भाजपा नेता जैसा प्रतीत हो रहा है, जिसे कई यूजर्स ने 'अनुचित' व्यवहार करार दिया है. हालांकि, इस फुटेज की प्रमाणिकता की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है. जैसे-जैसे वीडियो को लोकप्रियता मिली, इसे कई बार रीपोस्ट किया गया, जिससे झांसी की स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है.
आदर्श शर्मा लाला वीडियो:
इस व्यक्ति का वीडियो वायरल हुआ था आज यह सफाई दे रहे हैं कि वायरल वीडियो AI द्वारा बना हुआ था...
अब तुम ही बताओ @grok क्या वायरल वीडियो AI था या ओरिजनल।। https://t.co/MXjKL9SVhC pic.twitter.com/hNOiLj7Ioo
— Rahul Kumar (@rahulku72863611) May 12, 2026
आदर्श शर्मा लाला ने आरोपों को नकारा
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आदर्श शर्मा लाला ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि इस क्लिप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का उपयोग करके तैयार किया गया है और यह उनकी छवि को धूमिल करने का एक सोची-समझी साजिश है.
उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इस तरह के फर्जी वीडियो पर विश्वास न करें और न ही इसे आगे साझा करें. उनके अनुसार, सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए आजकल तकनीक का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है.
कानूनी कार्रवाई की मांग
यद्यपि भाजपा नेता ने अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन उनके समर्थकों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों के खिलाफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करती है.













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