PM Kisan 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के लाभार्थियों के लिए अगली किस्त को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. 13 मार्च 2026 को 22वीं किस्त सफलतापूर्वक जारी होने के बाद, अब देश के करोड़ों किसान 23वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. सरकारी सूत्रों और पिछले रुझानों के अनुसार, केंद्र सरकार जून या जुलाई 2026 के दौरान इस किस्त की राशि पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर (DBT) कर सकती है.
23वीं किस्त की संभावित तारीख और प्रक्रिया
पीएम किसान योजना के नियमानुसार, हर चार महीने के अंतराल पर किसानों को 2000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. चूंकि 22वीं किस्त मार्च के मध्य में जारी की गई थी, इसलिए अगली किस्त का समय जून-जुलाई के बीच बन रहा है. हालांकि, कृषि मंत्रालय ने अभी तक किसी सटीक तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन तैयारी अंतिम चरण में बताई जा रही है.
इन किसानों की अटक सकती है किस्त
सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कुछ नियमों को अनिवार्य कर दिया है. यदि आपने निम्नलिखित कार्य पूरे नहीं किए हैं, तो आपकी 23वीं किस्त रुक सकती है:
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ई-केवाईसी (e-KYC): सभी लाभार्थियों के लिए पोर्टल पर ई-केवाईसी पूरा करना अनिवार्य है.
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भूलेख सत्यापन (Land Records): आपके नाम पर कृषि भूमि का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट होना चाहिए.
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आधार सीडिंग: बैंक खाता आधार से लिंक होना और डीबीटी (DBT) के लिए सक्रिय होना आवश्यक है.
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फार्मर आईडी (Farmer ID): कई राज्यों में अब नई नियमावली के तहत फार्मर आईडी को भी अनिवार्य किया जा रहा है.
लाभार्थी सूची में अपना नाम कैसे जांचें
किसान भाई यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनका नाम 23वीं किस्त की सूची में है या नहीं, इन आसान चरणों का पालन कर सकते हैं:
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आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं.
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'Farmers Corner' सेक्शन में जाकर 'Beneficiary List' पर क्लिक करें.
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अपने राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव का चयन करें.
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'Get Report' पर क्लिक करते ही आपके गांव के लाभार्थियों की सूची खुल जाएगी.
योजना का महत्व और बजट
पीएम किसान योजना के तहत सरकार किसानों को सालाना 6000 रुपये की वित्तीय मदद प्रदान करती है. केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो कृषि क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह राशि सीधे तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में मदद पहुंचाती है.












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