Ladki Bahin Yojana Update: लाडकी बहनों को बड़ा झटका, 80 लाख महिलाओं के पैसे आने हुए बंद; जानें क्या है वजह
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Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'मुख्यमंत्री लाडकी बहीण योजना' को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई जांच के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को इस योजना के लिए अपात्र (Ineligible) घोषित कर दिया गया है. इन महिलाओं के बैंक खातों में योजना की अगली किस्त के पैसे आने बंद हो गए हैं. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अपात्र घोषित किए जाने का मुख्य कारण अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया का पूरा न होना और सरकारी नियमों व पात्रता मानदंडों पर खरा न उतरना है.

ई-केवाईसी न होना बनी सबसे बड़ी वजह

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 80 लाख अपात्र महिलाओं में से लगभग 60 लाख महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने सरकार द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी.  यह भी पढ़े: Ladki Bahin Yojana May Installment Date: लाडकी बहन योजना की मार्च-अप्रैल की क़िस्त के बाद अब मई के 1500 रुपये का इंतजार, जानें कब खाते में ट्रांसफर होगी रकम

इसके अतिरिक्त, बाकी बची 20 लाख महिलाओं को योजना के तय नियमों और शर्तों को पूरा न करने के कारण लिस्ट से बाहर किया गया है. जांच में सामने आया कि इनमें से कई परिवारों के पास चार पहिया वाहन थे, या वे पहले से ही अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अनुचित लाभ ले रहे थे.

पहले चरण में 2 करोड़ से अधिक महिलाएं थीं पात्र

विधानसभा चुनाव से पहले जब महायुति सरकार ने इस योजना की घोषणा की थी, तब शुरुआती चरणों में राज्य भर से लगभग 2 करोड़ 31 लाख महिलाओं को इसके लिए पात्र पाया गया था.

योजना के तहत 65 वर्ष तक की महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही थी. हालांकि, बाद में बड़े पैमाने पर विसंगतियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन और आधार आधारित ई-केवाईसी कराने का कड़ा फैसला लिया.

अपात्र सरकारी कर्मचारियों से होगी पैसों की वसूली

महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कुछ चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं. कई सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने भी गलत तरीके से इस योजना का लाभ उठाकर मासिक किस्तें प्राप्त की थीं.

विभाग ने अब ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए गलत तरीके से वितरित की गई राशि की वसूली (Recovery) के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है. इसके साथ ही, जिन पात्र महिलाओं ने ई-केवाईसी कर ली है लेकिन तकनीकी कारणों से उनके पैसे अटके हैं, उनके आवेदनों की भी री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया जारी है.

विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के माध्यम से महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है.

सुप्रिया सुले ने कहा, "चुनाव के समय बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के जल्दबाजी में इस योजना को लागू किया गया. अब एक-डेढ़ साल बाद सरकार को अचानक यह अहसास होना कि 80 लाख महिलाएं अपात्र हैं, बेहद अजीब है. यह इस सरकार की प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है. सरकार ने राज्य की माताओं-बहनों के साथ विश्वासघात किया है."