Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र में लाड़की बहिन योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, सीएम देवेंद्र फडणवीस बोले- 'अपात्रों और फर्जी आवेदकों को हटाया गया'
सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo Credits: File Image)

मुंबई, 2 जून: महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) की प्रमुख कल्याणकारी योजना 'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना' (Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana) को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक अपडेट सामने आया है. राज्य में चलाए गए एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (e-KYC) सत्यापन अभियान के समापन के बाद लगभग 80 लाख महिलाओं को इस वित्तीय सहायता योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया है. लाभार्थी संख्या में आई इस अचानक गिरावट के बाद विपक्षी दलों ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि राज्य का खजाना गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है. हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सरकार ने किसी वैध लाभार्थी को बाहर नहीं किया है, बल्कि एक पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से केवल अपात्र और फर्जी आवेदकों को हटाया गया है. यह भी पढ़ें: Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की मंत्री अदिति तटकरे का स्पष्टीकरण—'किसी भी पात्र महिला का आवेदन खारिज नहीं हुआ', विपक्ष ने लगाया 80 लाख महिलाओं को बाहर करने का आरोप

ई-केवाईसी और कड़े नियमों के कारण घटी संख्या

वरिष्ठ राज्य अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ई-केवाईसी अनुपालन की अंतिम समयसीमा समाप्त होने के बाद योजना के पंजीकृत लाभार्थियों की कुल संख्या 2.4 करोड़ से तेजी से घटकर लगभग 1.7 करोड़ पर आ गई है. आठ महीनों तक चली इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत लाभार्थियों को अपने बैंक खातों को बायोमेट्रिक और पहचान रिकॉर्ड से जोड़ना अनिवार्य था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी धन का वितरण सही हाथों में हो रहा है.

आधिकारिक विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 50 से 55 लाख आवेदक अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे. इसके अलावा, डेटा मिलान के दौरान बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन पाया गया. लगभग 12 लाख पंजीकृत लाभार्थी आयकर दाता (Income-Tax Payers) निकले, जिनकी पारिवारिक आय योजना की तय सीमा से अधिक थी. वहीं, 4.5 लाख से अधिक आवेदक 65 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा को पार कर चुके थे, और लगभग 5 लाख महिलाओं को इसलिए अयोग्य ठहराया गया क्योंकि वे पहले से ही सरकार की समानांतर 'नमो शेतकरी योजना' के तहत समान वित्तीय लाभ ले रही थीं.

मुख्यमंत्री फडणवीस ने किया सत्यापन अभियान का बचाव

मुंबई में आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बजट की कमी के कारण योजना का दायरा छोटा किए जाने के दावों को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार कम आय वाले परिवारों की सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी पात्र महिला को सूची से नहीं हटाया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने किसी को बाहर नहीं निकाला है. पात्रता के कई मानदंड तय थे. जब हमने केवाईसी प्रक्रिया शुरू की, तो ऐसे लाभार्थी सामने आए जो या तो अपात्र थे या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां थीं."

मुख्यमंत्री ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस ऑडिट के दौरान शुरुआती पंजीकरणों में भारी अनियमितताएं पकड़ी गईं, जिसके तहत लाभ उन समूहों तक पहुंच रहा था जो इसके हकदार नहीं थे. जांच में पाया गया कि लगभग 14,000 पुरुषों, 5 लाख सरकारी कर्मचारियों, 10 लाख आयकर दाताओं और 5 लाख ऐसे व्यक्तियों को भी भुगतान हो रहा था जिनके पास पंजीकृत वाणिज्यिक या निजी वाहन मौजूद हैं, जिन्हें अब पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रणाली ने 25 लाख वैध महिला लाभार्थियों की फाइलों में मौजूद तकनीकी त्रुटियों को सफलतापूर्वक ठीक करने का काम भी किया है.

विपक्ष का आरोप: वित्तीय संकट छुपाने की है कोशिश

इस बड़े पैमाने पर की गई छंटनी को लेकर विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और कांग्रेस के नेताओं ने तर्क दिया है कि सरकार ने 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बिना किसी पर्याप्त प्रशासनिक तैयारी के इस मासिक वजीफा कार्यक्रम को शुरू किया था. अब अचानक दिखाई जा रही यह सख्ती बढ़ते राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने के लिए एक सोची-समझी रणनीतिक पैंतरेबाज़ी है.

एनसीपी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि यदि ये लोग अपात्र थे, तो वे लगभग दो साल तक बिना किसी पकड़ के सीधे नकद लाभ कैसे प्राप्त करते रहे? उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "अब सीधे 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर देना उन लोगों को उनके हाल पर छोड़ देने जैसा है, जिनसे सहायता का वादा किया गया था." उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम इस बहु-करोड़ी योजना को पूरी तरह बंद करने का एक पूर्व संकेत हो सकता है.

योजना की पृष्ठभूमि और भविष्य की रूपरेखा

'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना' महायुति सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिससे राज्य के खजाने पर सालाना ₹40,000 करोड़ से अधिक का अनुमानित वित्तीय बोझ आता है. इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को ₹1,500 की प्रत्यक्ष मासिक नकद सहायता (Direct Cash Transfer) दी जाती है, बशर्ते उनके परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम हो.

विपक्ष की ओर से सुप्रिया सुले जैसी वरिष्ठ नेताओं ने शुरुआती चरण में सार्वजनिक धन के कथित कुप्रबंधन की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है. वहीं दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जनता को आश्वस्त किया है कि यह योजना सभी सत्यापित और पात्र नागरिकों के लिए भविष्य में भी बिना किसी रुकावट के निर्बाध रूप से चलती रहेगी.