Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की मंत्री अदिति तटकरे का स्पष्टीकरण—'किसी भी पात्र महिला का आवेदन खारिज नहीं हुआ', विपक्ष ने लगाया 80 लाख महिलाओं को बाहर करने का आरोप
अदिति तटकरे (Photo Credits: File Image)

मुंबई, 1 जून: महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री (Maharashtra's Minister for Women and Child Development) अदिति तटकरे (Aditi Tatkare) ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' (Chief Minister Majhi Ladki Bahin Yojana) के तहत किसी भी लाभार्थी का आवेदन खारिज नहीं किया गया है. उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि लगभग 80 लाख महिलाओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन आवेदकों ने निर्धारित समय के भीतर अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, केवल उनके लाभ को अस्थायी रूप से निलंबित (Suspend) किया गया है। सरकार इन सभी मामलों का दोबारा सत्यापन (Re-verification) कराने जा रही है. यह भी पढ़ें: Ladki Bahin Yojana Update: लाडकी बहनों को बड़ा झटका, 80 लाख महिलाओं के पैसे आने हुए बंद; जानें क्या है वजह

अपात्रता के मानदंडों और ई-केवाईसी पर स्थिति स्पष्ट

कैबिनेट मंत्री अदिति तटकरे ने योजना की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि संबंधित विभागों से उन आवेदकों की जानकारी प्राप्त हुई है जो आयु और आय के तय मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं. इसके अलावा, जिन आवेदकों के नाम पर आरटीओ (RTO) में वाहन पंजीकृत हैं या जो पहले से ही सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, उनके विवरण भी दर्ज किए गए हैं.

उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन महिलाओं ने ई-केवाईसी पूरा कर लिया है और उनके पास कोई वाहन पंजीकरण नहीं है, फिर भी उनका लाभ निलंबित हुआ है, उनके दस्तावेजों की विभागीय स्तर पर दोबारा जांच की जाएगी. तटकरे ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की किसी भी लाडकी बहिन (प्यारी बहन) के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

विपक्ष का हमला: सुप्रिया सुले ने की स्वतंत्र ऑडिट की मांग

दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर महायुति सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि तकनीकी कारणों से किसी भी पात्र महिला को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि शुरुआत में योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 2.38 करोड़ थी, जो बाद में बढ़कर 2.46 से 2.48 करोड़ तक पहुंच गई थी. लेकिन ई-केवाईसी अनिवार्य होने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 1.66 करोड़ रह गई है.

सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि आधिकारिक पोर्टल पर केवल 1.12 करोड़ आवेदन और 1.06 करोड़ स्वीकृतियां दिखाई दे रही हैं, जिसका अर्थ है कि सवा करोड़ से अधिक महिलाएं इस दौड़ से बाहर हो गई हैं. उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र के ईमानदार करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग रोकने के लिए इस पूरी योजना की उच्च स्तरीय जांच और एक स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना चाहिए.

80 लाख महिलाओं के हटने से उपजा राजनीतिक विवाद

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी इस मामले पर सरकार की तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा, "यह बेहद दुखद है कि लाडकी बहिन योजना से लगभग 80 लाख महिलाओं को सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है. इन लाखों महिलाओं के भीतर सुलग रहे आक्रोश और नाराजगी के बीच यह सरकार ज्यादा दिनों तक सत्ता में टिक नहीं पाएगी."

गौरतलब है कि दिसंबर 2024 तक इस योजना के तहत 17,505 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी थी. वर्तमान में ई-केवाईसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद सक्रिय लाभार्थियों की संख्या में आई इस भारी गिरावट ने राज्य में एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक विवाद को जन्म दे दिया है.