अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक को अपनी सप्लाई चेन से बाहर कर दिया है. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की गठबंधन सरकार एसपीडी के एक नेता ने इसे जर्मनी और यूरोप के लिए "जीवन में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर" बताया.एआई कंपनी एंथ्रोपिक की कीमत लगभग 380 अरब डॉलर (327 अरब यूरो) आंकी गई है. इस कंपनी ने क्लॉड एआई नामक लार्ज लैंग्वेज मॉडल की एक श्रृंखला विकसित की है. इनका इस्तेमाल कई तरह के कामों में हो सकता है, जैसे ड्रोन को नियंत्रित करने में मदद करना. साल 2024 के आखिर से यह कंपनी अमेरिकी सरकार और उसकी सेना के साथ साझेदारी में काम कर रही है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों की मानें तो क्लॉड एआई का इस्तेमाल वेनेजुएला में हुई छापेमारी और ईरान पर हुई बमबारी में भी किया गया था. लेकिन यह साफ नहीं है कि इसका इस्तेमाल किस तरह और कैसे किया गया.
फरवरी के अंत में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एंथ्रोपिक से अपने कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) में से कुछ शर्तें हटाने की मांग की है. इन शर्तों के मुताबिक क्लॉड एआई का इस्तेमाल बड़े स्तर पर निगरानी करने के लिए नहीं हो सकता. ये शर्तें इस एआई के स्वचालित हथियारों में इस्तेमाल होने से भी प्रतिबंधित करती हैं.
जब एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने सरकार कि इस मांग को मानने से इनकार कर दिया, तो पीट हेगसेथ ने उनकी कंपनी को "सप्लाइ चेन रिस्क" घोषित कर दिया. यह किसी अमेरिकी कंपनी के साथ होने वाला पहला मामला था. इसके अलावा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सभी सरकारी एजेंसियों को एंथ्रोपिक की सेवाओं का इस्तेमाल न करने का आदेश भी जारी किया. कंपनी ने सरकार के इसी निर्णय को अदालत में चुनौती दी है. उनका कहना है कि इससे कंपनी को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है और छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है.
एंथ्रोपिक ने अपनी वेबसाइट पर दिए एक बयान में बताया कि ट्रंप प्रशासन की मांग को न मानने के दो मुख्य कारण हैं. उन्होंने कहा, "एक तो, हमें नहीं लगता कि आज के अत्याधुनिक एआई इतने काबिल हैं कि उन्हें स्वचालित हथियारों में पूरी तरह उपयोग किया जाए. दूसरा, हम मानते हैं कि अमेरिकी नागरिकों की बड़े स्तर पर निगरानी उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन है."
एक क्रांतिकारी योजना
एसपीडी के डिजिटल पॉलिसी प्रवक्ता मथियास मीवेस ने चांसलर मैर्त्स और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा कि उन्हें एंथ्रोपिक को यूरोप आने की पेशकश करनी चाहिए, ताकि वह यहां अपने "मानव केंद्रित और भरोसेमंद एआई" मॉडल बना सकें. मीवेस ने डॉयचे वेले को बताया कि एंथ्रोपिक ने अमेरिकी सरकार के आदेश को न मानकर यह साबित कर दिया कि "लोगों की सुरक्षा एंथ्रोपिक के लिए काफी महत्वपूर्ण है और यह यूरोप की कानूनी स्थिति से भी मेल खाता है."
मीवेस ने अपने पत्र को सोशल मीडिया पर भी साझा किया. इसमें उन्होंने अपने 3 प्रस्तावों का जिक्र किया है.
बर्लिन, म्यूनिख या पेरिस जैसे किसी बड़े यूरोपीय शहर को एंथ्रोपिक का संभावित मुख्यालय बनाना.
नए यूरोपीय निवेशकों का ऐसा गठबंधन बनाना, जिसमें यूरोपीय पेंशन फंड और यूरो-बॉन्ड जैसी सरकारी संस्थाएं भी शामिल हों, ताकि "डिजिटल संप्रभुता" सुनिश्चित की जा सके.
यूरोपीय आयोग और प्रमुख यूरोपीय देशों की भविष्य में एंथ्रोपिक से साझेदारी की गारंटी.
लेकिन एआई विशेषज्ञों ने मीवेस की इस योजना पर अपना संदेह व्यक्त किया है. जर्मनी के एआई उद्योग संघ बीवीकेआई के प्रमुख डेनियल अबू ने मीवेस की इस योजना को "बहुत ही अच्छा विचार" बताया, लेकिन यह भी कहा की यह योजना सच्चाई से काफी दूर है. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया कि एंथ्रोपिक के यूरोप आने से उन्हें बेहद खुशी होगी, मगर इसमें दिक्कतें भी हैं. उन्होंने कहा, "एंथ्रोपिक के प्रमुख निवेशक एमेजॉन और गूगल हैं. साथ ही इसका कामकाज अमेरिकी क्लाउड सिस्टम और निवेश बाजार से काफी गहराई से जुड़ा हुआ है. अगर एंथ्रोपिक ने यहां आने का निर्णय लिया तो उसकी आर्थिक स्थिति खतरे में पड़ सकती है."
अमेरिका-चीन को कैसी टक्कर देगा जर्मनी का इंडस्ट्रियल एआई
अबू का यह भी मानना है कि "सिर्फ सरकारी कान्ट्रैक्ट रद्द होने से एंथ्रोपिक के व्यापार में भारी मंदी आ जाए, ऐसा असंभव सा लगता है. क्लॉड कोड और ओपस 4.6 जैसे एआई आसमान छू रहे हैं और उनके पास इसके काफी ज्यादा यूजर्स भी हैं.” उनके अनुसार, "एंथ्रोपिक पर अमेरिकी सरकार के दबाव के कारण सैन्य क्षेत्र पर बुरा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपना सारा व्यापार समेट कर यहां आ जाएंगे.”
एआई क्षेत्र में यूरोप की प्रमुख जरूरतें
अबू के मुताबिक कारगर योजना यही होगी कि यूरोप और एंथ्रोपिक के बीच साझेदारी हो और एक 'एआई लैब' की संरचना की जाए. इससे "रिवर्स ब्रेन ड्रेन की पहल” होगी और यूरोपीय लोगों को अमेरिकी एआई कंपनियों में नौकरी करने के लिए देश छोड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. उनका मानना है कि दरअसल यूरोप में एक बेहतर वेन्चर केपिटल ईकोसिस्टम की कमी है. उनका यह भी कहना है कि यूरोप में विस्तार की संभावनाओं में कमी के चलते वेन्चर कैपिटल को आकर्षित करना भी मुश्किल हो जाता है.
अबू की संस्था बीवीकेआई 600 जर्मन एआई कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है. उनकी सबसे बड़ी समस्या है इन कंपनियों को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए पैसे जुटाना. दुर्भाग्यवश, इसी दिक्कत की वजह से कई जर्मन कंपनियां अपना रुख अमेरिका की तरफ कर लेती हैं.
मीवेस यह बात समझते हैं कि उनकी योजना थोड़ी अव्यावहारिक सी लगती है, लेकिन काफी क्रांतिकारी भी है. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया, "यकीनन यह योजना कठिन है और इसके सफल होने की संभावना बेहद कम है, लेकिन मुझे यह प्रस्ताव देने की आखिर क्या जरूरत थी? जरूरत इसलिए थी, क्योंकि मुझे लगता है यूरोप को कुछ बड़ा सोचने की जरूरत है.” उन्होंने यह भी कहा, "अगर एआई के क्षेत्र से जुड़े हर विकास को चीन और अमेरिका के भरोसे नहीं छोड़ना चाहते हैं, तो हमें इस क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे.”
डिजिटल आत्मनिर्भरता की जरूरत
यूरोपीय संघ अपने एआई अधिनियम को लाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. यह अधिनियम संघ में एआई लागू करने की रणनीति का एक हिस्सा है. इस रणनीति को नैतिक मूल्यों के आधारों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इनमें शामिल है नए ऐप्स को उनसे जुड़े जोखिमों के आधार पर अलग अलग श्रेणी में बांटना, जैसे अस्वीकार्य, उच्च, सीमित और न्यूनतम. हालांकि कुछ कंपनियां हैं, जो यूरोपीय संघ से इस कानून को स्थगित करने का आग्रह कर रही हैं. अगर यह कानून लागू हो जाता है तो उन्हें डर है कि भविष्य में होने वाली नई खोजों पर बुरा असर पड़ेगा और यूरोप का एक "एआई महाद्वीप" बनने का सपना मुश्किल में पड़ जाएगा.
यूरोपीय राजनीतिज्ञ और एआई क्षेत्र से जुड़े हुए व्यवसायी नियमित रूप से 'डिजिटल संप्रभुता' को हासिल करने के महत्व पर बातचीत करते हैं. इसका मतलब है बौद्धिक संपत्ति की रक्षा के साथ ही ईयू का डाटा और विशेषज्ञता भी ईयू के दायरों में संरक्षित रहे.
मिस्ट्राल नामक फ्रांस की एक एआई कंपनी इस वक्त यूरोप की इकलौती ऐसी कंपनी है जो लार्ज लैंग्वेज मॉडल का निर्माण कर सकती है. इस कंपनी के सीईओ आर्थर मेन्श का कहना है कि यह बेहद जरूरी था कि हम अमेरिकी और चीनी एआई कंपनियों को यूरोपीय उद्योगों से दूर रखें. उन्होंने जर्मन सार्वजनिक प्रसारक डीएलएफ को यह भी बताया कि "जीडीपी में एआई का योगदान बहुत बड़ा होगा, इसलिए हम नहीं चाहते कि हमारा उद्योग अमेरिकी एआई पर निर्भर रहे. उन्हें आगे कहा, "जिस तरह की निर्भरता हम पैदा कर रहें हैं, वह हमारे लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है." इसका अर्थ यह है कि हमें एआई मॉडल्स का निर्माण करना होगा और उन डाटा केंद्रों को संचालित करने में सक्षम होना होगा.
एसपीडी के प्रवक्ता मीवेस बताते हैं कि भले ही देश के राजनीतिज्ञ इस समस्या से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन डिजिटल संप्रभुता के मामले में सब टालमटोल करते हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठाते. उनका यह भी कहना है कि "इस मामले में कभी कोई महत्वाकांक्षी कदम नहीं उठाए गए हैं. इसी बात ने मुझे यह प्रस्ताव रखने पर मजबूर कर दिया, ताकि इस बात पर जबरदस्त चर्चा की शुरुआत हो सके और पता चल सके कि वास्तव में हमें इस क्षेत्र में क्या करने की आवश्यकता है."
एंथ्रोपिक से इस विषय पर टिप्पणी के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन इस लेख के प्रकाशन तक उनका कोई जवाब नहीं मिला.













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