Labour Day 2026: क्यों मनाया जाता है 'मई दिवस'? जानें भारत में मजदूर दिवस का इतिहास और इस साल की खास थीम
श्रमिक दिवस 2026 (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 30 अप्रैल: भारत आगामी शुक्रवार, 1 मई 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' (International Labour Day) मनाने के लिए तैयार है. देश के विभिन्न हिस्सों में 'अन्तरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' ( Antrarashtriya Shramik Divas), 'कामगार दिन' (Kamgar Din) या 'उझैपलर थिनम' (Uzhaipalar Dhinam) के रूप में मशहूर यह दिन न केवल एक सार्वजनिक अवकाश है, बल्कि यह कार्यबल के योगदान और उनके अधिकारों के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को याद करने का अवसर भी है. यह दिन विशेष रूप से 16 घंटे के थकाऊ काम के बजाय '8 घंटे के कार्यदिवस' (8-Hour Workday) के मानक को लागू करवाने की वैश्विक जीत का प्रतीक माना जाता है. यह भी पढ़ें: Dry Day: 1 मई 2026 को 'ड्राई डे', महाराष्ट्र और दिल्ली में बंद रहेंगी शराब की दुकानें; जानें क्या है कारण

मई दिवस का इतिहास: शिकागो से पेरिस तक का सफर

आधुनिक श्रमिक आंदोलन की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में अमेरिका से हुई थी. 1886 में, अमेरिकी श्रमिकों ने काम के घंटों को कम करने की मांग को लेकर एक विशाल हड़ताल शुरू की. यह आंदोलन मई 1886 में शिकागो के 'हेमार्केट अफेयर' (Haymarket Affair) के दौरान हिंसक मोड़ पर पहुंच गया, जिसने वैश्विक स्तर पर श्रमिक अधिकारों की गूँज पैदा की.

1889 में पेरिस में आयोजित 'इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस' ने शिकागो के शहीदों की याद में और श्रमिकों की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए हर साल 1 मई को 'अंतरराष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया.

भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत

भारत में लेबर डे मनाने की परंपरा हेमार्केट विरोध प्रदर्शनों के लगभग चार दशक बाद शुरू हुई. भारत में पहला मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में मनाया गया था. इसकी शुरुआत 'लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान' द्वारा की गई थी.

इस ऐतिहासिक आयोजन का नेतृत्व वामपंथी नेता मलयापुरम सिंगारवेलु चेट्टियार ने किया था. इसी अवसर पर पहली बार भारत में लाल झंडा फहराया गया था और सरकार से 1 मई को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने का आग्रह किया गया था. तब से यह दिन भारतीय कैलेंडर का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है.

मजदूर दिवस 2026 की थीम

यद्यपि 1 मई के लिए कोई एक वैश्विक अनिवार्य थीम नहीं होती है, क्योंकि यह मुख्य रूप से एक स्मृति दिवस है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के प्रभाव में इस वर्ष का विमर्श "स्वस्थ मनोसामाजिक कार्य वातावरण" (A Healthy Psychosocial Working Environment) पर केंद्रित है. यह विषय कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है.

आज के दौर में प्रासंगिकता

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, मजदूर दिवस का महत्व और बढ़ गया है। जहाँ पहले संघर्ष केवल काम के घंटों के लिए था, वहीं आज भारत में चर्चा 'गिग इकोनॉमी' (Gig Economy) और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल युग में 'वर्क-लाइफ बैलेंस' पर केंद्रित हो गई है.

1 मई को भारत के कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश रहता है. इस दिन ट्रेड यूनियनों द्वारा रैलियां, सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि 1923 में शुरू हुए आंदोलन की विरासत को जीवित रखा जा सके और भविष्य की श्रम नीतियों को प्रभावित किया जा सके.