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जर्मन नेताओं पर 'सिग्नल' ऐप के जरिए साइबर हमला, रूस पर शक

जर्मनी में एक बड़े साइबर हमले का खुलासा हुआ है.

जर्मन नेताओं पर 'सिग्नल' ऐप के जरिए साइबर हमला, रूस पर शक
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में एक बड़े साइबर हमले का खुलासा हुआ है. सिग्नल मैसेजिंग ऐप के जरिए सांसदों, राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और पत्रकारों को निशाना बनाया गया है. जर्मन सरकार को शक है कि इन फिशिंग हमलों के पीछे रूस का हाथ है.जर्मन और विदेशी सुरक्षा एजेंसियों ने सिग्नल मैसेजिंग ऐप के जरिए हो रहे फिशिंग हमलों के बारे में एक बार फिर चेतावनी जारी की है. इन हमलों का निशाना सांसद और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बनाए जा रहे हैं. इस हमले के पीछे किसी 'राज्य-नियंत्रित साइबर एक्टर' का हाथ माना जा रहा है, यानी यह किसी देश की सरकार द्वारा संचालित अभियान है.

समाचार एजेंसी एएफपी को जर्मन सरकार के एक सूत्र ने बताया, "संघीय सरकार यह मानकर चल रही है कि सिग्नल मैसेजिंग सर्विस को निशाना बनाने वाला यह फिशिंग अभियान संभवतः रूस से चलाया गया था." हालांकि मॉस्को ने इस तरह के किसी भी हमले में शामिल होने से साफ इनकार किया है.

रिपोर्टों के अनुसार, हैकर्स शिकार बनाए जाने वाले लोगों को सिग्नल सपोर्ट के नाम से फर्जी मैसेज भेजते हैं. इसमें उनसे पिन दर्ज करने, कोई लिंक खोलने या क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहा जाता है. अगर यह चाल कामयाब हो जाती है, तो हैकर्स को उपयोगकर्ता के मैसेज, चैट ग्रुप और साझा की गई तस्वीरों व फाइलों तक पूरी पहुंच मिल जाती है. इतना ही नहीं, हमलावर उस व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके किसी और को मैसेज भी भेज सकते हैं.

सिग्नल ऐप को काफी सुरक्षित माना जाता है. पहले जब वॉट्सऐप ने कहा था कि वह अपनी मूल कंपनी मेटा (जिसके पास फेसबुक और इंस्टाग्राम भी हैं) के साथ मेटा डेटा साझा करेगा, तब प्राइवेसी की चिंताओं के कारण कई उपयोगकर्ताओं ने वॉट्सऐप छोड़कर सिग्नल का रुख किया था.

सैकड़ों राजनीतिक और सरकारी खाते हैक

जर्मन सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि इस फिशिंग अभियान से कितने सांसद प्रभावित हुए हैं, लेकिन स्थानीय मीडिया का अनुमान है कि राजनीतिक हस्तियों के कम से कम 300 खातों को हैक किया गया है. नेताओं के अलावा, वरिष्ठ सिविल सेवकों, राजनयिकों, सैन्य कर्मियों और पत्रकारों को भी इसमें निशाना बनाया गया है.

खुफिया निगरानी समिति के उपाध्यक्ष और सांसद कोन्स्टांटिन फॉन नोत्स ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने एएफपी को बताया, "आने वाले दिनों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती रहेगी, जिनकी अभी तक रिपोर्ट नहीं की गई है."

उन्होंने आगे कहा, "वर्तमान में कोई भी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता है कि सांसदों के बीच होने वाले कम्युनिकेशन की गोपनीयता अभी भी सुरक्षित है या नहीं."

'सिग्नल' पर बैन लगे या नहीं

इस गंभीर मुद्दे से कैसे निपटा जाए, इसे लेकर अब जर्मन संसद (बुंडेस्टाग) में बहस चल रही है. जर्मन संसद की उपाध्यक्ष आंड्रेया लिंडहोल्त्स (सीएसयू) ने सिग्नल ऐप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के विचार को फिलहाल खारिज कर दिया है. उनका मानना है कि सांसद इस मामले में अपना फैसला खुद लेने के लिए स्वतंत्र हैं.

हालांकि, संसद में यह सवाल जरूर उठाया गया है कि क्या बुंडेस्टाग के कंप्यूटरों पर सिग्नल ऐप के डेस्कटॉप संस्करण के इस्तेमाल को सीमित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हमलों से बचा जा सके.

ध्यान देने वाली बात यह है कि साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से, जर्मनी साइबर हमलों, जासूसी और साजिशों का लगातार निशाना बनता रहा है. जर्मनी वर्तमान में यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान करने वाला सबसे बड़ा देश है.

'सिग्नल' का मालिक कौन है

2012 में स्थापित सिग्नल, कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में स्थित सिग्नल फाउंडेशन के स्वामित्व में है. इसकी नींव क्रिप्टोग्राफर और उद्यमी मोक्सी मार्लिनस्पाइक ने रखी थी, जिन्हें वॉट्सऐप के सह-संस्थापक ब्रायन एक्टन से शुरुआती 5 करोड़ डॉलर की पूंजी मिली थी.

सिग्नल की वेबसाइट पर लिखा है, "हम किसी भी बड़ी टेक कंपनी से संबद्ध नहीं हैं और ना ही कोई कंपनी हमें कभी खरीद सकती है.” सिग्नल का विकास मुख्यतः अनुदान और दान से होता है.

सिग्नल का दावा है कि इसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन यह सुनिश्चित करता है कि भेजा गया हर संदेश एक उलझे हुए रूप में सफर करता है और केवल रिसीवर ही उसे पढ़ सकता है. बीच में कोई भी, जैसे- सेवा देने वाली कंपनी, इंटरनेट प्रोवाइडर, या कोई हैकर संदेश को नहीं पढ़ सकते हैं.

सिग्नल अकेला ऐप नहीं है जो यह सुविधा देता है, लेकिन वॉट्सऐप और एप्पल के आईमैसेज के विपरीत, यह ऐप एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था द्वारा नियंत्रित है, ना कि किसी राजस्व-केंद्रित बड़ी टेक कंपनी द्वारा. कंपनी कहती है कि यही खासियत इसे निजता के प्रति सजग लोगों में ज्यादा विश्वसनीय बनाती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 27, 2026 11:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).