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पूर्वज नाजी थे ये पता चलने पर जर्मनी में कैसा लगता है

जर्मनी के बहुत से लोग इन दिनों अपने पूर्वजों के नाजी शासन से जुड़े होने की जानकारी ढूंढ रहे हैं.

पूर्वज नाजी थे ये पता चलने पर जर्मनी में कैसा लगता है
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी के बहुत से लोग इन दिनों अपने पूर्वजों के नाजी शासन से जुड़े होने की जानकारी ढूंढ रहे हैं. अमेरिका से जारी दस्तावेजों ने इसका पता लगाना आसान कर दिया है, हालांकि जवाबों का सामना आसान नहीं है.बहुत से जर्मन परिवारों ने एक मुश्किल सवाल का सामना किया हैः जब देश में युद्ध था तब उनके पूर्वज क्या कर रहे थे? अब इसका जवाब महज कुछ क्लिक दूर है, हालांकि शायद इसका जवाब सुनकर शायद उन्हें अच्छा नहीं लगेगा.

इसी साल मार्च में अमेरिका के नेशनल अर्काइव्स ने अडोल्फ हिटलर की नाजी पार्टी के लगभग 12 लाख सदस्यता कार्ड को ऑनलाइन पोस्ट किया. यह रिकॉर्ड अमेरिकी सैनिकों ने दूसरे विश्वयुद्ध में नाजियों को हराने के बाद जब्त किया था. ये दस्तावेज पहले सिर्फ माइक्रोफिल्म में ही उपलब्ध थे. ऑनलाइन जारी होने के बाद कई दशकों तक दबे रहे इतिहास के राज अब आसानी से ढूंढे जा सकते हैं.

जब पता लगा कि पिता नाजी पार्टी से जुड़े थे

जर्मनी के 'डी साइट' और 'डेयर श्पीगल' अखबारों ने तो तुरंत ही ऑनलाइन टूल भी लॉन्च कर दिए जो जर्मन लोगों को इस अर्काइव को खंगालने में मदद करेंगे. "वाज ग्रैंडपा अ नाजी? (क्या दादाजी एक नाजी थे?)" पूरे जर्मनी में इस हेडलाइन से कहानियां चल रही हैं. इसके बाद से लाखों जर्मन अपने पूर्वजों के नाम के लिए रिकॉर्ड को खंगाल रहे हैं. हालांकि उन्हें ये अहसास है कि इसके नतीजे में उन्हें अप्रिय सच का सामना करना पड़ सकता है.

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इनमें से एक 60 साल की कोरिना ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्हें अपने पिता के नाजियों के साथ जुड़ने के बारे में खबर मिली है. हिटलर के सत्ता में आने के दो साल बाद ही उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी. उनकी बेटी 26 साल के हेलेना को डिजिटल अर्काइव से इस बात का सबूत मिला है. कोरिना ने एएफपी से अपना आखिरी नाम जाहिर नहीं करने को कहा. उनका कहना है, "जब मेरी युवा बेटी ने फोन पर मुझे इसके बारे में बताया और फिर फाइल का स्क्रीनशॉट भेजा तो मैं बहुत चकित थी."

कोरिना ने बताया कि वह जानती थी कि उनके पिता जर्मन सेना की फ्रांस और रूस से लड़ाई में घायल हो गए थे. हालांकि उन्होंने नाजियों से सहानुभूति की बात कभी नहीं बताई. उनका हमेशा से यह मानना रहा कि उनके पिता पश्चिमी जर्मनी के सारलैंड क्षेत्र के एक माइनिंग परिवार से आते थे और जर्मनी की सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के आजीवन सदस्य थे.

कई दशकों की खामोशी

जर्मनी ने अपने नाजी इतिहास को हमेशा याद रखा है और उसका प्रायश्चित किया है, इसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है. हालांकि जर्मन परिवार युद्ध के बारे में आमतौर पर बात नहीं करना चाहते या फिर कई बार इसके बारे में झूठ भी बोलते हैं. 1945 में जब हिटलर का थर्ड राइष पराजित हुआ, तब तक जर्मनी का हर 10 में से एक आदमी नाजी पार्टी से जुड़ चुका था.

इतिहासकार योहानेस श्पोर का कहना है कि युद्ध के बाद की इस पीढ़ी ने, "परिवारों के वातावरण के जरिए यह साफ कर दिया था कि कुछ बातों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए." श्पोर लंबे समय से परिवारों को उनके पूर्वजों के नाजी इतिहास तक पहुंचने में मदद करते रहे हैं. श्पोर ने कहा कि बहुत से पूर्व नाजी, "अकसर चुपचाप नहीं रहते हैं, जैसा कि दावा किया जाता है, बल्कि इतिहास का एक अलग संस्करण भी बताते हैं." कई बार वे खुद को नाजीवाद के पीड़ित या फिर छोटे नाजीविरोधी आंदोलन का सदस्य बताते हैं.

श्पोर ने हाल ही में हुए एक सर्वे की ओर ध्यान दिलाया जिसमें पता चला कि 11-18 फीसदी जर्मन मानते हैं कि उनके पूर्वजों ने नाजी सत्ता के अत्याचार के पीड़ितों की मदद की थी. श्पोर के मुताबिक हालांकि हाल में हुए ऐतिहासिक रिसर्च के मुताबिक ऐसे लोगों की तादाद एक फीसदी से कम थी.

42 साल के इतिहास के प्रोफेसर फेलिक्स पुएल्म को अपनी दादी के नाजियों से जुड़ने के बारे में जानकारी मिली है. यह 1940 में हुआ तब उनकी दादी की उम्र महज 19 साल थी.उन्होंने एएफपी से कहा, तब "वह पहले से जानती थीं कि नाजियों ने पड़ोसी देशों के खिलाफ युद्ध छेड़ा है" और "क्या हो रहा है इसके बारे में उन्हें काफी कुछ पता था." पुएल्म का कहना है, "इसके बाद भी उन्होंने यह फैसला किया."

जटिल सवाल

पुएल्म के मुताबिक अगर उन्हें इस बारे में पहले पता होता तो वो अपनी दादी की मौत से पहले उनसे "ज्यादा सवाल पूछते." उन्होंने यह भी कहा कि उनके दादा-दादी ने युद्ध के बाद हिटलर की सत्ता से कभी सहानुभूति नहीं दिखाई. थाईलैंड की सिल्पाकोर्न यूनिवर्सिटी में काम करने वाले पुएल्म का कहना है,"हालांकि उन्होंने उस वक्त क्या किया उसके बारे में सबकुछ नहीं बताया."

श्पोर का कहना है कि कोई नाजी पार्टी से कब जुड़ा उसकी तारीख से उनकी प्रतिबद्धता के बारे में जाना जा सकता है, "अगर कोई 1920 के दशक में या 1930 के दशक के शुरुआती सालों में जुड़ा, हिटलर के सत्ता में आने से पहले तो यह एक प्रतिबद्धता दिखाता है, वे सचमुच उस मकसद के लिए लड़ना चाहते थे."

1933 के बाद जुड़ने वाले ज्यादातर लोगों ने अवसर का लाभ उठाना चाहा, उन्हें नौकरी सुरक्षित करनी थी या फिर नाजी अफसरशाही से फायदा उठाना था. इतिहासकार श्पोर का कहना है, "कुछ ऐसे पेशेवर क्षेत्र थे जिनमें बहुत सारे पार्टी सदस्य थे, उदाहरण के लिए सिविल सर्विस और टीचर. और आप निश्चित रूप से कह सकते हैं कि एक तरह का सामाजिक दबाव था लेकिन किसी को भी पार्टी से जुड़ने के लिए मजबूर नहीं किया गया."

पुएल्म के मुताबिक नाजी अर्काइव के बारे में जानकारी की खिड़की खुलने से ज्यादा जर्मन लोगों को धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी के मौजूदा उभार के बारे में विचार करने के लिए प्रेरित करेगा. फिलहाल ज्यादातर सर्वेक्षणों में यह पार्टी शीर्ष पर चल रही है. पुएल्म को यह भी उम्मीद है कि जानकारियां सामने आने से "बहुत से परिवार थोड़ा समय निकाल कर उन कारणों के बारे में भी सोचेंगे जो उन्हें ऐसी पार्टी से जुड़ने के लिए कह रहे हैं."

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2026 07:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).