जर्मनी फिर करेगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीट के लिए दावेदारी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव हारने के बाद जर्मनी ने 2035-36 और 2043-44 कार्यकाल के लिए फिर से दावेदारी करने का ऐलान किया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव हारने के बाद जर्मनी ने 2035-36 और 2043-44 कार्यकाल के लिए फिर से दावेदारी करने का ऐलान किया है.जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2035-36 कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव लड़ेगा. यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले ही जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.
मैर्त्स ने यह ऐलान मोंटेनेग्रो में यूरोपीय संघ और पश्चिमी बाल्कन देशों के शिखर सम्मेलन में किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को हुए मतदान में जर्मनी को ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल के मुकाबले हार मिली थी. सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए जर्मनी को 104 वोट मिले, जबकि जीत के लिए 127 वोटों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले. संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं.
यह पहली बार था जब जर्मनी सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हासिल करने में असफल रहा. इससे पहले जर्मनी छह बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है और सबसे हाल में उसने 2019-20 कार्यकाल में सीट संभाली थी.
हार के कारणों की जांच
विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के आदेश दिए हैं. चांसलर मैर्त्स ने वाडेफुल को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि इस बार जर्मनी शुरुआत से ही लंबी अवधि की तैयारी करेगा. उन्होंने 2035-36 और 2043-44 दोनों कार्यकालों के लिए जर्मनी की नई उम्मीदवारी की घोषणा की. जर्मननी बहुत समय से स्थायी सीट की मांग करता रहा है.
मैर्त्स ने कहा कि स्वीडन की दावेदारी को देखते हुए वह यूरोपीय संघ के भीतर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि यूरोप से केवल सीमित संख्या में उम्मीदवार मैदान में हो और खासकर यूरोपीय संघ के भीतर से अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी दावेदारी न आए.
चांसलर ने वाडेफुल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस अभियान के लिए कड़ी मेहनत की. मैर्त्स ने यह भी कहा कि जर्मनी की मौजूदा दावेदारी कई साल पहले घोषित हुई थी, लेकिन बहुत देर से सक्रिय तैयारी शुरू हुई.
वाडेफुल ने भी माना कि संयुक्त राष्ट्र में मिला परिणाम संतोषजनक नहीं था. न्यूयॉर्क से मेक्सिको पहुंचे वाडेफुल ने कहा कि अब अगली चुनौती की तैयारी शुरू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को शुरुआत से ही बढ़त हासिल थी और जर्मनी ने अपेक्षाकृत देर से अपनी सक्रिय दावेदारी शुरू की.
उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार ने इस हार से पहला निष्कर्ष निकालते हुए भविष्य के कार्यकालों के लिए अभी से उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है. वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी दुनियाभर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, खासकर यूरोप में.
समर्थन कम नहीं करेगा जर्मनी
इस बीच मेक्सिको सिटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाडेफुल ने उन मांगों को खारिज कर दिया, जिनमें सुरक्षा परिषद चुनाव हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र को दी जाने वाली जर्मनी की आर्थिक सहायता घटाने की बात कही गई थी.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था बनी हुई है और जर्मनी इसमें पूरी तरह सक्रिय रहेगा. वाडेफुल ने कहा कि संकट और संघर्षों के समाधान के मामले में संयुक्त राष्ट्र से अधिक वैधता रखने वाली कोई दूसरी संस्था नहीं है.
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जर्मनी के हेसे राज्य के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री मानफ्रेड पेंट्स ने सुझाव दिया था कि सुरक्षा परिषद सीट नहीं मिलने के बाद जर्मनी संयुक्त राष्ट्र को अपनी वित्तीय सहायता कम करने पर विचार कर सकता है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो शक्ति है. बाकी 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं.
जर्मनी की हालिया हार को उसकी कूटनीतिक रणनीति के लिए एक झटका माना जा रहा है, लेकिन बर्लिन ने साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगा और भविष्य में फिर से सुरक्षा परिषद की सीट हासिल करने का प्रयास करेगा.
विवेक कुमार (डीपीए, रॉयटर्स)
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 06, 2026 07:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

