Ram Navami 2019: पूर्ण अवतारी नहीं थे मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम, उनके जीवन से जुड़ी ऐसी बातें जो हर राम भक्त जरूर जानना चाहेगा
राम नवमी 2019 (File Image)

Rama Navami 2019: हिंदू धर्म शास्त्रों में श्रीराम (Shri Ram)  को भगवान विष्णु (Lord Vishu) का अवतार माना गया है. तुलसीदास की रामचरितमानस और वाल्मीकि कृत रामायण में श्रीराम जी के जीवन की तमाम यादों का उल्लेख बड़े मर्मस्पर्शी तरीके से किया गया है. गौरतलब है कि विष्णु जी के अवतार श्री राम ने मर्यादा की स्थापना और अपनी मां कैकेयी की इच्‍छापूर्ति के लिए राजपाट छोड़कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था. ऐसे ही कई दिव्य प्रसंगों के कारण श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है. यहां हम श्री राम जी से जुड़े कुछ रोचक प्रसंग (Unique Facts) आपसे शेयर करेंगे.

  •  मान्यता है कि भगवान राम का जन्म मनु के 10 पुत्रों में से एक पुत्र इक्ष्वाकु कुल में हुआ था.
  • चैत्र नवमी को भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था. इसी उपलक्ष्य में चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में भी जाना जाता है.
  • कहते हैं कि श्रीराम ने लंका नरेश रावण की कैद से सीता जी को आजाद कराने के लिए लंका जाते समय रास्‍ते में आए समुद्र को पार करने के लिए एकादशी का व्रत किया था. श्री राम ने रावण का वध करने के बाद छोटे भाई विभीषण को लंका का राजा बनाया था.
  • पुराणों में वर्णित है कि माता कैकेयी के कहे अनुसार वनवास जाते समय भगवान राम की आयु 27 वर्ष थी.
  • श्रीराम-रावण के युद्ध के समय इंद्र देवता ने श्रीराम के लिए दिव्य रथ भेजा था. इसी में बैठकर भगवान राम ने रावण का वध किया था. यह भी पढ़ें: Ram Navami 2019: राम नवमी पर करेंगे ये उपाय तो परिवार में आएगी सुख, शांति और समृद्धि
  • राम-रावण का युद्ध जब बहुत लंबा खींचने लगा, तब महर्षि अगस्त्य ने राम से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने को कहा था.
  • अरण्‍य नामक राजा ने रावण को श्राप दिया था कि मेरे वंश से उत्पन्न युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा. इन्ही के वंश में श्रीराम ने जन्म लिया था.
  • गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्‍या को श्राप देकर पत्थर बना दिया था. इस श्राप से राम ने ही मुक्ति दिलाई थी.
  • श्रीराम को राम नाम रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दिया था.
  • श्रीराम को पूर्ण अवतार नहीं माना जाता, क्योंकि श्रीराम को 14 कलाएं ज्ञात थीं, जबकि श्री कृष्ण 16 कलाओं में पारंगत थे. कहा जाता है कि ऐसा जान बूझ कर किया गया था, क्योंकि रावण को अमरत्व के कई वरदान प्राप्त थे, उसका वध एक मनुष्य ही कर सकता था, इसीलिए श्री राम को मनुष्य रूप में ही रहना जरूरी था.
  • जब श्रीराम के अवतार का प्रयोजन सिद्ध हो गया, तब उन्हें एक आम मनुष्य की तरह ही शरीर त्यागना था. लेकिन उनके सच्चे भक्त महाबलशाली हनुमान के होते यमराज के लिए श्रीराम तक पहुंचना संभव नहीं था. इसलिए श्रीराम ने महल के फर्श की दरार में अपनी अंगूठी गिराकर हनुमान जी से अंगूठी लाने के लिए कहा. हनुमान जी उसे खोजते-खोजते नाग लोक पहुँच गए. वहां उन्होंने नागों के राजा नाग वासुकी से प्रभु राम की अंगूठी के बारे में पूछा, नाग वासुकी ने उन्हें बताया कि राम जी ने ऐसा उनका ध्यान भटकाने के लिए किया है ताकि यमराज राम जी को ले जा सके.
  • श्री राम के अनुज लक्ष्मण सीता माता और भगवान राम की रक्षा के लिए 14 वर्ष के वनवास काल में एक भी दिन नहीं सोये थे. इसलिए उनका एक नाम गुडाकेश भी है.
  • रावण मायावी था, उससे मुकाबला करने के लिए इंद्र देवता ने राम जी के लिए एक दिव्य रथ भेजा था. उसी रथ में बैठ कर राम ने रावण को परास्त किया था.
  • रामचरित मानस के अनुसार राम-रावण का युद्ध 32 दिन चला था जबकि दोनों सेनाओं के बीच 87 दिन तक युद्ध हुआ.
  • श्री लंका जाने के लिए समुद्र पर रामसेतु का निर्माण करने में सिर्फ 5 दिन लगे थे.
  • देवी सीता बचपन में ही भगवान शिव का धनुष खेल-खेल में उठा लेती थीं. इसलिए राजा जनक ने उनके स्‍वयंवर के समय धनुष तोड़ने की शर्त रखी थी.
  • कहते हैं कि गिलहरी पर जो तीन धारियां हैं वह भगवान राम के आर्शीवाद के कारण हैं. दरअसल, जब लंका पर आक्रमण करने के लिए रामसेतु बनाया जा रहा था तब एक गिलहरी भी इस काम में मदद कर रही थी. उसके समर्पण भाव को देखकर श्रीराम ने प्रेमपूर्वक उसकी पीठ पर अपनी उँगलियाँ फेरी थीं और तभी से गिलहरी पर ये धारियां मौजूद है. यह भी पढ़ें: Ram Navami 2019: श्रीराम नवमी- ‘मनोरथ सिद्धि’ के लिए क्या करें और क्या करने से बचें
  • रावण खुद को अजेय समझता था, लेकिन एक बार राजा अनरण्य ने उसे शाप दिया कि उनके वंश से उत्पन्न युवक ही उसकी मृत्यु का का कारण बनेगा. श्री राम राजा अनरण्य के वंश में ही जन्मे थे.
  • श्री राम जी के चार भाई थे – राम, लक्षमण, भरत, शत्रुघ्न, और उनकी एक बड़ी बहन भी थीं जिनका नाम शांता था.
  • रावण अपने समय का सबसे बड़ा ज्ञानी था, इसलिए एक बार राम जी ने रावण को महा-ब्राह्मण कह कर पुकारा था और उसकी मृत्यु के समय लक्ष्मण को उससे ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजा था.

गौरतलब है कि लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्रीराम ने रामेश्वरम में शिव लिंग बना कर शिव अराधना की थी. आज भी रामेश्वरम हिन्दुओं के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है.

नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है और यह लेखक की अपनी निजी राय है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसके बारे में हर व्यक्ति की सोच और राय अलग-अलग हो सकती है.