Holika Dahan 2026 Sanskrit Wishes: 'होलिका पर्व शुभकामनाः'! इन खास संस्कृत श्लोकों और संदेशों के साथ अपनों को दें होलिका दहन की बधाई
होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

Holika Dahan 2026 Sanskrit Wishes: रंगों के महापर्व होली (Holi) से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन (Holika Dahan) का त्योहार आध्यात्मिक शुद्धि और विजय का संदेश लेकर आता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. साल 2026 में होलिका दहन 3 मार्च (मंगलवार) को मनाया जा रहा है, जिसके अगले दिन यानी 4 मार्च को धुलेंडी या रंगों वाली होली खेली जाएगी. इस पावन अवसर पर लोग अग्नि की पूजा कर नकारात्मकता को जलाने और जीवन में सकारात्मकता के संचार की प्रार्थना करते हैं.

होलिका दहन को शास्त्रों में 'आसुरी शक्तियों' के विनाश और 'दैवीय भक्ति' की विजय के रूप में देखा जाता है. इस दिन लकड़ी, उपलों और घास-फूस से होलिका तैयार की जाती है. विधि-विधान से पूजा के बाद इसे प्रज्वलित किया जाता है. परंपरा के अनुसार, भक्त नई फसल की बालियों और फलियों को अग्नि में अर्पित करते हैं, जिसे आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि और अच्छी पैदावार की कामना का प्रतीक माना जाता है.

1- अग्ने नय सु॒पथा राये अस्मान्।
भावार्थ: हे अग्नि, सभी प्रकार के ज्ञान को जानकर, हमें अच्छे मार्ग से धन की ओर ले चलो.

होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

2- ‎होलिकायां भवेद्भस्मम ईर्ष्या-द्वेष-अघानि।
भावार्थ: होलिका की अग्नि में ईर्ष्या, द्वेष और बुराई का नाश हो जाए.

होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

3- अहिरण्यमनलं वन्दे समृद्धं विश्वतोमुखम् ।
भावार्थ: मैं अग्नि को नमन करता हूं, जो सुनहरा है. धन से परिपूर्ण है और संसार का दृष्टा है.

होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

4- ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि।
तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।
भावार्थ: मैं महान ज्वाला, अग्नि देवता पर ध्यान करता हूं. वह (मंगल) अग्नि हमें (समृद्धि और कल्याण की ओर) उत्तेजित करे.

होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

5- अग्निं प्रज्वलितं वन्दे जातवेदं हुताशम् ।
हिरण्यवर्णममलं समिद्धं विश्वतोमुखम् ॥
भावार्थ: जो प्रकाशमान है, सबका ज्ञाता है, सुनहरा, धन से परिपूर्ण और संसार का दृष्टा है, उस अग्नि को मैं प्रणाम करता हूं.

होलिका दहन 2026 (Photo Credits: File Image)

होलिका दहन की जड़ें प्राचीन पौराणिक कथा में समाहित हैं. माना जाता है कि इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी और अहंकारी राजा हिरण्यकशिपु की बहन होलिका अग्नि में भस्म हो गई थी. होलिका के पास आग से न जलने का वरदान था, लेकिन अधर्म का साथ देने के कारण उसका अंत हुआ. यही कारण है कि यह दिन आत्मा की शुद्धि और मन की पवित्रता का प्रतीक बन गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका की अग्नि की परिक्रमा करने से शरीर के रोगों का नाश होता है और मानसिक शांति मिलती है. यह त्योहार केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि कृषि चक्र से भी गहराई से जुड़ा है. अग्नि में अर्पित की गई नई फसल देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है.