ईरान पर हालिया हमलों के बाद जर्मनी की गठबंधन सरकार में सहयोगी दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ने अमेरिका और इस्राएल पर हमले की वजहें पेश करने की मांग उठाई है.ईरान पर अमेरिका और इस्राएल द्वारा किए गए हालिया हमलों के बाद जर्मनी में राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है. जर्मनी की गठबंधन सरकार में सहयोगी दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता रोल्फ मुत्सेनिष ने दोनों देशों से हमलों के कारणों और सबूतों को सार्वजनिक करने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक ठोस जानकारी सामने नहीं आएगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल बने रहेंगे.
इस्राएल और अमेरिका ने ईरान के राजनीतिक और सैन्य ठिकानों पर व्यापक हमले किए और साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खमेनेई को भी मार दिया. इन कार्रवाइयों को अमेरिका और इस्राएल ने "एहतियाती कदम” बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है. हालांकि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में ईरान की जनता को सत्ता अपने हाथ में लेने और उसे बदलने की बात कही थी.
"सबूत सार्वजनिक किए जाएं”
रोल्फ मुत्सेनिष ने समाचार एजेंसी डीपीए को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "इस्राएली सरकार ने सैन्य हस्तक्षेप को एहतियाती प्रतिक्रिया बताया है. लेकिन जब तक वे अपने सबूत सार्वजनिक नहीं करेंगे, तब तक संदेह बना रहेगा.”
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीति पर भी प्रश्न उठाए. उन्होंने कहा,"अमेरिकी प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत को निरर्थक क्यों माना गया.”
जिनेवा में वार्ता, लेकिन प्रगति नहीं
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हाल ही में जिनेवा में बातचीत हुई थी. यह वार्ता बिना ठोस परिणाम के समाप्त हुई, लेकिन इसे पूरी तरह विफल भी घोषित नहीं किया गया. इसी बीच अमेरिकी नेतृत्व ने मार्च की शुरुआत तक ठोस प्रगति की समय-सीमा तय की थी.
इस्राएल लंबे समय से कहता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित करने की दिशा में बढ़ रहा है. वहीं तेहरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है. इस्राएल अब तक अपने तर्कों का सबूत नहीं दे पाया है.
तेहरान की व्यवस्था पर टिप्पणी
मुत्सेनिष ने तेहरान की मौजूदा व्यवस्था की कठोरता को स्वीकार करते हुए कहा, "ईरान की भारी बहुसंख्या और कई अन्य देश यह चाहेंगे कि वहां एक वैध सरकार और जिम्मेदार संसद स्थापित हो.” लेकिन उन्होंने आगे यह भी जोड़ा, "अनुभव बताता है कि इस तरह के राजनीतिक परिवर्तन बाहर से शुरू नहीं किए जा सकते, खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां पहले भी कई बार बाहरी हस्तक्षेप हुए हैं.”
संघर्ष विराम की अपील
मुत्सेनिष ने दोनों पक्षों से दुश्मनी खत्म करने की अपील की ताकि आम नागरिक सुरक्षित स्थानों पर जा सकें. उनका कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर आम लोगों पर पड़ता है, इसलिए मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. खाड़ी क्षेत्र की स्थिति फिलहाल संवेदनशील बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह इस बात पर है कि आगे कूटनीतिक प्रयास होते हैं या तनाव और बढ़ता है.













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