ईरान के पडोसी खाड़ी देशों को डर है कि अमेरिका और इस्राएल के संयुक्त हमलों के बीच होरमुज जलडमरूमध्य बंद हो सकता है, जिसका असर पूरे विश्व पर पड़ेगा.समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने से पहले ही पड़ोसी देशों में गहरी चिंता थी. ईरान के पड़ोसी देश के एक राजनयिक सूत्र ने एजेंसी से कहा, "अगर अमेरिका हमला करेगा तो ईरान जवाब देगा और संकट पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा. होरमुज जलडमरूमध्य बंद हो सकता है.” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में अराजकता तुर्की और यूरोपीय संघ तक फैल सकती है और लाखों शरणार्थी सीमा पार कर सकते हैं.
खाड़ी देशों में ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर हलचल
खाड़ी क्षेत्र के देश डर रहे हैं कि ईरान सीधे या अपने सहयोगियों के जरिए जवाब देगा. मेडिटेरेनियन फाउंडेशन फॉर स्ट्रैटेजिक स्ट्डीज के निदेशक ने पियरे रजू ने एएफपी से कहा, "खाड़ी देश जानते हैं कि वे असुरक्षित हैं. ईरान के पास मध्यम दूरी की पर्याप्त मिसाइल हैं जो जल शोधन संयंत्र, ऊर्जा केंद्र और बिजली घरों को निशाना बना सकती हैं.”
पिछले साल कतर स्थित अमेरिकी बेस पर हुए ईरानी हमले ने इस डर को और बढ़ा दिया था. इस साल जनवरी में कतर, सऊदी अरब और ओमान ने अमेरिका से आग्रह किया कि मिसाइल स्ट्राइकों को स्थगित किया जाए, ताकि स्थिति काबू से बाहर न जाए.
सत्ता परिवर्तन और हिंसा का खतरा
जानकारों का कहना है कि अगर ईरान की सत्ता को बाहरी दबाव से बदला गया तो हिंसा फैल सकती है. यूरोप की एक इंटेलिजेंस सेवा के एक अधिकारी ने एजेंसी से कहा, "सत्ता परिवर्तन देश के भीतर से होना चाहिए. यदि अमेरिका या इस्राएल इसे थोपेंगे, तो उल्टा असर पड़ सकता है, जैसा लीबिया में हुआ.”
मिडल ईस्ट इंस्टिट्यूट की गोनुल तोल कहती हैं, "तुर्की को डर है कि सीमा पर अराजकता फैलेगी, शरणार्थी बढ़ेंगे और कुर्द समूह ज्यादा सक्रिय होंगे.” पाकिस्तान की स्थिति भी नाजुक है. पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने एएफपी को बताया, "अगर संकट पाकिस्तान की सीमा पार फैला तो वहां इसका गंभीर असर होगा.”
शरणार्थी संकट और तेल की आपूर्ति
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की अस्थिरता नए शरणार्थी संकट को जन्म दे सकती है. कार्नेगी यूरोप के शोधकर्ता सिनान उलगेन कहते हैं, "ईरान का आकार और आबादी बड़ी है. इसलिए सीमा पार (दूसरे देशों में) इसके झटके कहीं ज्यादा बड़े हो सकते हैं.” इससे अजरबैजान और आर्मेनिया जैसे छोटे देशों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है.
तेल उत्पादक खाड़ी देशों को भी चिंता सता रही है. यूरोपीय विदेश नीति परिषद की शोधकर्ता चिंजिया बियांको ने एएफपी को बताया, "अगर होरमुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित होगी. पियरे रजू का कहना है कि खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति में कमी आने से दुनिया के सबसे बड़े आयातक चीन को अन्य स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. यह खाड़ी देशों के सरकारों और शासकों के लिए बुरी खबर होगी, जो अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं.












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