अमेरिका और इस्राएल की बमबारी के बीच ट्रंप का ऐलान, किया ईरान की सरकार गिराने का खुला आह्वान.अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के वेस्ट पाम बीच से राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले का ऐलान करते हुए कहा कि अब ईरान का अंत करीब है. अमेरिका और इस्राएल की संयुक्त बमबारी शुरू होने के बाद जारी एक संदेश में ट्रंप ने साफ कहा कि उनका मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ईरान में हुई 1979 की क्रांति के बाद से सत्ता में बैठी व्यवस्था को हटाना है.
"हम उनकी नौसेना और मिसाइलें मिटा देंगे”
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, "हम उनकी मिसाइलों को नष्ट कर देंगे और उनकी मिसाइल बनाने की पूरी व्यवस्था को मिट्टी में मिला देंगे. सब कुछ पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा. हम उनकी नौसेना का सफाया कर देंगे.”
उन्होंने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा, "ईरान के महान लोगों, आज रात मैं कहता हूं कि तुम्हारी आजादी की घड़ी आ गई है.”
ट्रंप ने लोगों को घरों के अंदर रहने की चेतावनी भी दी. उन्होने कहा, "आप बाहर ना निकलें. बाहर बहुत खतरा है. हर जगह बम गिरेंगे. जब हम अपना काम पूरा कर लें, तब अपनी सरकार अपने हाथ में ले लेना. वह फिर आपकी सरकार होगी.”
ट्रंप ने ईरानी सुरक्षाबलों, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड को सीधी चेतावनी दी. उन्होंने कहा, "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड, सशस्त्र बलों और सभी पुलिस कर्मियों से मैं कहता हूं कि आज रात अपने हथियार डाल दो. आपको पूरी सुरक्षा दी जाएगी, नहीं तो निश्चित मौत का सामना करना पड़ेगा .”
ईरान के पूर्व शासक के बेटे ने कहा, "अंतिम जीत करीब”
अमेरिका और इस्राएल के हमलों के तुरंत बाद ईरान के पिछले शाह के बेटे रजा पहलवी ने जीत का भरोसा जताते हुए आवाम से कहा, "हम अंतिम जीत के बहुत करीब हैं. मैं जल्द से जल्द आपके साथ खड़ा होना चाहता हूं ताकि हम मिलकर ईरान को वापस लें और उसका पुनर्निर्माण करें.” वॉशिंगटन में निर्वासन में रह रहे पहलवी लंबे समय से धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की वकालत करते रहे हैं. उन्होंने ईरानियों से फिलहाल घरों में सुरक्षित रहने लेकिन सही समय पर सड़कों पर उतरने के लिए तैयार रहने की अपील की. पिछले महीने ईरान से ऐसी कई खबरें सामने आईं थीं जिनमें जनविद्रोह को कुचलने के लिए सरकार पर हजारों लोगों को मारने के आरोप लगे थे.
यह टकराव क्यों बढ़ा?
पिछले दिनों ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत हुई थी. ओमान के शीर्ष राजनयिक ने समझौते की उम्मीद जताई थी और कहा था कि ईरान समृद्ध यूरेनियम का भंडार शून्य रखने पर सहमत हो सकता है, हालांकि तेहरान ने ऐसे किसी भी लक्ष्य से इनकार किया था. इसके बावजूद ट्रंप ने पहले पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती का आदेश दिया और अब खुलकर सत्ता परिवर्तन की बात कह दी है.
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया में बढ़ता प्रभाव और अमेरिका-इस्राएल के साथ वर्षों पुरानी दुश्मनी है. 1979 की क्रांति के बाद से ईरान की सत्ता और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. हाल के महीनों में तेहरान पर परमाणु हथियार बनाने लायक यूरेनियम जुटाने के आरोप लगते रहे, जिसे ईरान नकारता रहा. ईरान का कहना था कि यूरेनियम परमाणु हथियारों के लिए नहीं है, बल्कि मुल्क की बेहतरी के लिए है. दूसरी ओर, इस्राएल लंबे समय से ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताता रहा है. लंबे समय से कूटनीतिक बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकला. ईरान इस बात पर डटा रहा कि उसे अपने विकास के लिए यूरेनियम जुटाने और इस्तेमाल करने का पूरा हक है. अमेरिका ने हाल के दिनों में खाड़ी देशों के इर्दगिर्द अब तक की सबसे ज्यादा सेना तैनात की है. जानकारों का मानना है कि यह हमला पूरी वार्ता को युद्ध की ओर मोड़ सकता है.












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