त्योहार

Chandra Shekhar Azad Jayanti 2020: चंद्र शेखर आजाद की 114वीं जयंती, जानें इस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी से जुड़ी दिलचस्प बातें

भारत मां के वीर सपूत और महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की आज 114वीं जयंती मनाई जा रही है. चंद्रशेखर आजाद की वीरगाथा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ स्थित भाबरा गांव में एक सनातनधर्मी ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

Chandra Shekhar Azad Jayanti 2020: चंद्र शेखर आजाद की 114वीं जयंती, जानें इस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी से जुड़ी दिलचस्प बातें
भारत के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ( फाइल फोटो )

Chandra Shekhar Azad 114th Birth Anniversary: भारत मां के वीर सपूत और महान स्वतंत्रता सेनानी (Revolutionary Freedom Fighter) चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) की आज 114वीं जयंती (Chandra Shekhar Azad 114th Birth Anniversary) मनाई जा रही है. चंद्रशेखर आजाद की वीरगाथा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. आजादी के इस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी ने यह प्रण लिया था कि वे कभी भी जिंदा पुलिस के हाथ नहीं लगेंगे. उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश (Mashya Pradesh) के झाबुआ (Jhabua) स्थित भाबरा गांव में एक सनातनधर्मी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता सीताराम तिवारी एक प्रकांड पंडित थे और उनकी माता जगरानी देवी गृहिणी थीं. आजाद के बचपन का नाम चंद्रशेखर सीताराम तिवारी था. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजाद ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था, जिसके चलते वे हमेशा अंग्रेजों के निशाने पर रहते थे. चलिए जानते हैं चंद्रशेखर जयंती (Chandra Shekhar Azad Jayanti) के खास अवसर पर इस महान स्वतंत्रता सेनानी के जीवन से जुड़ी रोचक बातें.

चंद्रशेखर आजाद से जुड़े रोचक तथ्य

1- चंद्रशेखर आजाद का नाम जन्म के बाद चंद्रशेखर तिवारी रखा गया था, लेकिन आगे चलकर उन्होंने अपने नाम के साथ आजाद जोड़ लिया. छोटी सी उम्र में ही उनके मन में ब्रिटिश शासन की क्रूरता और उनकी दमनकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह की भावना जागने लगी. उन्होंने साल 1921 में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया, उस दौरान उनकी उम्र महज 15 साल थी.

2- आजाद ने अपने शुरुआती दिनों में क्रांतिकारी के रूप में यह सौगंध ली थी कि वह कभी भी पुलिस के हाथ जीवित नहीं आएंगे. उन्होंने आखिरी दम तक अपने इस सौगंध का पालन किया. 27 फरवरी 1931 को जब इलाहाबाद के आजाद पार्क में घात लगाकर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया था तब उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय खुद को गोली मारने का विकल्प चुना.

3- चंद्रशेखर आजाद औपनिवेशक ब्रिटिश शासन को करारा झटका देने वाले तीन प्रमुख क्रांतिकारी घटनाओं में शामिल थे. साल 1925 में वे काकोरी ट्रेन रॉबरी में शामिल थे, इसके बाद साल 1926 में भारत की ट्रेन के वायसराय को उड़ाने की कोशिश में भी वे शामिल थे और साल 1928 में जेपी सॉन्डर्स की हत्या की साजिश रचने में भी आजाद शामिल थे.

4- स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान हमेशा अंग्रेजों के निशाने पर रहने वाले चंद्रशेखर आजाद ने इससे बचने के लिए झांसी के पास एक मंदिर में 8 फीट गहरी 4 फीट चौड़ी गुफा बनाई थी, जिसमें वे संन्यासी के वेश में रहते थे. अंग्रेजों को जब उनके इस गुप्त ठिकाने का पता चला तो उन्होंने वहां दबिश दी, लेकिन आजाद वहां से निकलने में कामयाब रहे. यह भी पढ़ें: Birthday Special: चन्द्रशेखर आजाद, एक ऐसा क्रांतिकारी जिसे कभी जिंदा नहीं पकड़ पाई थी ब्रिटिश हुकूमत

5- जालियांवाला बाग की दिल दहला देने वाली घटना के बाद चंद्रशेखर आजाद आग बबूला हो गए. इस कांड के बाद उन्होंने झाबुआ में आदिवासियों से तीरंदाजी का प्रशिक्षण लिया, ताकि वे हर हालात में अंग्रेजों का डटकर मुकाबला कर सकें. आजाद अपने पास हमेशा एक पिस्टल (माउजर) रखते थे, जिसका नाम उन्होंने बमतुल बुखारा रखा था.

चंद्रशेखर आजाद कभी नहीं चाहते थे कि उनकी कोई भी तस्वीर अंग्रेजों के हाथ लगे, इसलिए उन्होंने अपनी सारी तस्वीरें नष्ट कर दी थीं, लेकिन उनकी एक आखिरी तस्वीर झांसी में रह गई थी, जिसे नष्ट नहीं किया जा सका. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2020 10:04 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).