Gariaband SDM Orchestra Video: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर आयोजित ऑर्केस्ट्रा में अश्लीलता का नंगा नाच सामने आया है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है. वीडियो में मैनपुर के एसडीएम तुलसीदास मरकाम (SDM Tulsidas Markam) न केवल डांस का लुत्फ उठाते नजर आए, बल्कि वे नर्तकियों पर पैसे लुटाते और मोबाइल से रिकॉर्डिंग करते भी दिखे. इस शर्मनाक घटना के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को पद से हटा दिया है और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.
सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में अश्लीलता
जानकारी के अनुसार, गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र के उरमाल गांव में 'युवा समिति' द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 5 से 10 दिसंबर की अनुमति ली गई थी. हालांकि, 9 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में ओडिशा की 'जय दुर्गा ओपेरा' की नर्तकियों द्वारा कथित तौर पर बेहद अश्लील और अर्धनग्न नृत्य किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंच पर फूहड़ता की सारी हदें पार कर दी गईं, जबकि प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बनकर इसे देखते रहे. यह भी पढ़े: Obscene Dance on Janmashtami: जन्माष्टमी पर अश्लील डांस क्यों? यूपी के बादलपुर थाने में मुजरा, बिहार के मोतिहारी में बार गर्ल के साथ दिखे मुखिया
गरियाबंद ऑर्केस्ट्रा विवाद
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना का वीडियो वायरल होते ही छत्तीसगढ़ शासन में हड़कंप मच गया. कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम तुलसीदास मरकाम को उनके पद से हटाकर कलेक्ट्रेट अटैच कर दिया है. इसके साथ ही मामले की जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है.
पुलिस विभाग ने भी अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई की है. पुलिस अधीक्षक (SP) वेदव्रत सिरमौर्य ने तीन पुलिसकर्मियों—प्रधान आरक्षक डिलोचन रावटे, आरक्षक शुभम चौहान और आरक्षक जय कंसारी को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये पुलिसकर्मी भी कार्यक्रम के दौरान नर्तकियों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करते पाए गए थे.
आयोजकों पर कानूनी शिकंजा
पुलिस ने इस मामले में अश्लीलता परोसने के आरोप में अब तक आयोजन समिति के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें देवानंद राजपूत, गोविंद देवांगन और नरेंद्र साहू सहित अन्य शामिल हैं। इसके अलावा, बाल संरक्षण आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और प्रशासन से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है कि क्या कार्यक्रम में कोई नाबालिग भी मौजूद था.
गरियाबंद की इस घटना ने सरकारी अधिकारियों पर उठे सवाल
गरियाबंद की इस घटना ने सरकारी अधिकारियों के सार्वजनिक आचरण और सांस्कृतिक आयोजनों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि यह आचरण सरकारी सेवा नियमों और सार्वजनिक नैतिकता का गंभीर उल्लंघन है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई होने की संभावना है।












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