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भाजपा संवेदनशील मुद्दों का फायदा उठाने और ध्रुवीकरण के तरीके ढूंढ रही

तेलंगाना में सत्ता हासिल करने के मकसद से भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए कुछ संवेदनशील मुद्दों का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है.

भाजपा संवेदनशील मुद्दों का फायदा उठाने और ध्रुवीकरण के तरीके ढूंढ रही
बीजेपी (Photo Credits: Twitter)

हैदराबाद, 11 सितंबर : तेलंगाना में सत्ता हासिल करने के मकसद से भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए कुछ संवेदनशील मुद्दों का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की दोस्ती, मुसलमानों के लिए 4 फीसदी आरक्षण, राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में उर्दू या हैदराबाद का नाम भाग्यनगर करने की मांग, ऐसा लगता है कि भगवा पार्टी के नेता हमेशा ऐसे मुद्दों की तलाश में रहती है जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का कारण बन सकते हैं. कई मौकों पर भाजपा नेताओं ने एआईएमआईएम के सियासी गढ़ हैदराबाद के पुराने शहर को लेकर सनसनीखेज आरोप लगाए. उन्होंने शहर के इस हिस्से को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के अड्डा के रूप में पेश करने की कोशिश की.

2019 में राज्य में चार लोकसभा सीटों पर जीत और दो विधानसभा उपचुनावों में जीत हासिल करने और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) में अपनी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के बाद से भाजपा आक्रामक रही है. खुद को टीआरएस के एकमात्र व्यवहार्य विकल्प के रूप में पेश करते हुए भाजपा नेताओं को 2023 के चुनाव में राज्य में सत्ता कायम करने का एक वास्तविक मौका दिखाई दे रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से भाजपा भावनात्मक मुद्दों को उठाती रही है, जो बहुसंख्यक समुदाय के वोट हासिल करने में मदद कर सकती है, खासकर हैदराबाद और उसके आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य के अन्य शहरी इलाकों में. यह भी पढ़ें : UP: शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 8 साल से काटा जा रहा वेतन अब मिलेगा वापस

वे कहते हैं कि तत्कालीन हैदराबाद राज्य में मुस्लिम शासन, स्वतंत्रता के बाद के उथल-पुथल के कारण हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय (17 सितंबर, 1948), हैदराबाद के कुछ हिस्सों में एआईएमआईएम का राजनीतिक वर्चस्व और क्रमिक सरकारों की कथित तुष्टीकरण नीतियां -- ये सब भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए 'गोला-बारूद' मुहैया कराते हैं. साल 2020 में बंदी संजय के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी संवेदनशील मुद्दों से राजनीतिक लाभ लेने के लिए एक तेज गति में चली गई है. एआईएमआईएम को उसके घरेलू मैदान पर चुनौती देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने ऐतिहासिक चारमीनार से सटे भाग्यलक्ष्मी मंदिर से अपनी राज्यव्यापी प्रजा संग्राम यात्रा शुरू की.

वास्तव में यह मंदिर, जिसकी वैधता पर अतीत में कई बार सवाल उठाए गए थे, सांप्रदायिक तनावों को भड़काते हुए पिछले कुछ वर्षो में भाजपा की राजनीति का केंद्रबिंदु बन गया है. भाजपा ने उसी मंदिर से 2020 में जीएचएमसी चुनावों के लिए अपना चुनाव अभियान शुरू किया. जीएचएमसी चुनावों के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और जुलाई में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यहां भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान इसका दौरा किया था पिछले महीने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी वाला एक वीडियो अपलोड करने के बाद भाजपा विधायक राजा सिंह के पार्टी द्वारा निलंबन को भगवा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नूपुर शर्मा की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक और शर्मिदगी से बचने के प्रयास के रूप में देखा गया था.

विश्लेषकों का कहना है कि राजा सिंह आदतन अपराधी थे, जिन्होंने अपने भड़काऊ बयानों से सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने की कोशिश की. जैसा कि उनके अपमानजनक वीडियो ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और यहां तक कि गड़बड़ी भी हुई, टीआरएस सरकार ने उन्हें निवारक निरोध (पीडी) अधिनियम लागू करने के बाद जेल भेजकर चाबुक मारा. हैदराबाद के गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र के विधायक के खिलाफ 2004 से अब तक 101 आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस के अनुसार, वह 18 सांप्रदायिक अपराधों में शामिल था. हाल के महीनों में जनसभाओं में भाजपा नेताओं के लहजे और तेवर से पता चलता है कि राजा सिंह सिर्फ तमाशा नहीं थे. बंदी संजय और राज्य के अन्य भाजपा नेता भी भड़काऊ बयान देते रहे हैं.

संजय, जो करीमनगर से लोकसभा सदस्य भी हैं, ने कथित तौर पर मई में अभद्र भाषा का प्रयोग किया था. उनके खिलाफ राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी. भाजपा नेता ने सभी मस्जिदों को खोदने की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि तेलंगाना में मुस्लिम शासकों ने कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया और उन पर मस्जिदों का निर्माण किया. उन्होंने दावा किया कि नीचे शिवलिंग मिलने की संभावना है. भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी तेलंगाना में सत्ता में आती है, तो वह सभी मदरसों को खत्म कर देगी, मुसलमानों के लिए आरक्षण खत्म कर देगी और उर्दू को मिली हुई दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा खत्म कर देगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 11, 2022 04:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).