Telangana Shocker: तेलंगाना के मेडक में कर्ज से परेशान दंपति ने 1.5 लाख में बेचा नवजात बेटा, 5 गिरफ्तार
तेलंगाना के मेदक जिले में एक आदिवासी दंपति ने कर्ज और आर्थिक तंगी के कारण अपने नवजात बेटे को ₹1.70 लाख में बेच दिया. पुलिस ने बच्चे को रेस्क्यू कर लिया है और जैविक माता-पिता सहित खरीदने वाले दंपति को गिरफ्तार किया है.
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हैदराबाद: तेलंगाना (Telangana) के मेडक जिले (Medak District) से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां गरीबी और भारी कर्ज से जूझ रहे एक आदिवासी दंपति (Tribal Couple) ने अपने ही नवजात बेटे (Newborn Baby Boy) का सौदा कर दिया. हवेली घनपुर मंडल (Haveli Ghanpur Mandal) के एक 'थंडा' (आदिवासी बस्ती) में रहने वाले इस दंपति ने कथित तौर पर अपने तीसरे बच्चे को ₹1.70 लाख में एक निसंतान दंपति को बेच दिया. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एकीकृत बाल विकास सेवा (Local Integrated Child Development Services) (ICDS) के कार्यकर्ता रूटीन फॉलो-अप के लिए उनके घर पहुंचे और बच्चे को गायब पाया. यह भी पढ़ें: Hyderabad Shocker: हैदराबाद में सीलबंद बीयर की बोतल के अंदर मिली जिंदा मछली, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
कर्ज और मजबूरी की कहानी
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जैविक माता-पिता पहले से ही दो बेटियों के पालन-पोषण और निजी साहूकारों के भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे. उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि तीसरे बच्चे की परवरिश करना उनके लिए नामुमकिन था. बिचौलियों के माध्यम से उन्होंने पड़ोसी जिले संगारेड्डी के एक निसंतान दंपति से संपर्क किया और यह अवैध सौदा तय किया.
रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस कार्रवाई
ICDS कार्यकर्ताओं की सूचना पर मेदक पुलिस और महिला एवं बाल कल्याण विभाग (WD&CW) ने संयुक्त अभियान चलाया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संगारेड्डी स्थित खरीदार के घर से शिशु को सकुशल बरामद कर लिया. बच्चे को वर्तमान में चिकित्सकीय निगरानी के लिए सरकारी 'शिशु विहार' भेज दिया गया है.
पुलिस ने इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने जैविक माता-पिता, बच्चा खरीदने वाले दंपति और इस सौदे में शामिल बिचौलियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
संगठित नेटवर्क का संदेह
अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह कोई एकल घटना है या इस क्षेत्र में कोई संगठित बच्चा तस्करी नेटवर्क सक्रिय है. मेदक जिला बाल संरक्षण इकाई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "आर्थिक परिस्थितियां चाहे जो भी हों, बच्चे को बेचना एक गंभीर अपराध है. हम परिवार को सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करेंगे, लेकिन तस्करी के मामले में कानूनी कार्रवाई अपनी दिशा में चलेगी."
कानूनी गोद लेने की जटिल प्रक्रिया और अवैध बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया (CARA के माध्यम से) लंबी और समय लेने वाली है. कई बार निसंतान दंपति सालों तक इंतजार करने के बजाय अवैध और त्वरित रास्तों को चुन लेते हैं, जो उन्हें कानूनी संकट में डाल देता है. तेलंगाना सरकार ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 'पालना योजना' (Cradle Scheme) और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की निगरानी तेज कर दी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 11, 2026 06:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

